मिशन वात्सल्य व बाल संरक्षण तंत्र की प्रभावी निगरानी की जरूरत हुई उजागर
प्रतापपुर (चतरा): चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड मुख्यालय से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां करीब 12 वर्षीय अज्ञात किशोरी बीते 15 दिनों तक लोहे की बेड़ियों में जकड़ी लावारिस हालत में इधर-उधर भटकती रही। यह दृश्य प्रखंड कार्यालय, पंचायत सचिवालय और कस्तूरबा आवासीय विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास देखा गया, जिससे बाल संरक्षण तंत्र की जमीनी सक्रियता पर प्रश्न खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, किशोरी मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत होती है। नाम-पता पूछने पर वह कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाती और केवल मुस्कुरा देती है। भीषण गर्मी में नंगे पांव और फटे कपड़ों में बेड़ियों के साथ भटकती यह बच्ची कई दिनों तक भोजन और पानी के अभाव में रही, जिससे स्थिति और भी मार्मिक हो गई।
मामले की जानकारी मिलने के बाद सामाजिक पहल के तहत इसकी सूचना संबंधित तंत्र को दी गई। तत्पश्चात टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर किशोरी को सुरक्षित संरक्षण में लेते हुए आगे की आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि मिशन वात्सल्य और बाल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी और स्थानीय स्तर पर संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी संकटग्रस्त बच्चे तक समय पर मदद पहुंच सके। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बच्ची को सुरक्षित स्थान पर रखकर समुचित देखभाल व उपचार उपलब्ध कराया जाए, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तंत्र को और सुदृढ़ किया जाए।
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