5000 रुपये घूस लेने के आरोप में हटाए गए थे कर्मी, 15 वर्षों का नर्सिंग अनुभव रखने वाली ममता ने पेश की अदम्य साहस की मिसाल, अस्पताल प्रबंधन आउटसोर्सिंग से करेगा स्थायी नियुक्ति
चतरा (झारखंड), न्यूज स्केल डेस्क: झारखंड के चतरा सदर अस्पताल में मंगलवार को एक ऐसा वाकया हुआ जिसने न सिर्फ स्वास्थ्य महकमे को हैरत में डाल दिया, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक मिसाल भी कायम कर दी। जब अस्पताल के नियमित पोस्टमार्टम कर्मी ने काम करने से साफ इनकार कर दिया, तब एक महिला ने आगे बढ़कर यह मुश्किल जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। माना जा रहा है कि शहर के बिंड मोहल्ला निवासी ममता देवी संभवतः झारखंड राज्य की पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने पोस्टमार्टम का कार्य किया है। इस साहसिक पहल के बाद उनकी पूरे राज्य में जमकर सराहना हो रही है।
घूसखोर कर्मी के इनकार से खड़ी हुई थी बड़ी चुनौती: प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल के नियमित पोस्टमार्टम कर्मी सुखदेव राम पर हाल ही में पोस्टमार्टम के एवज में 5000 रुपये की घूस लेने का गंभीर आरोप लगा था। इस शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रारंभिक स्तर पर कार्य से अलग कर दिया था। इसी बीच दुर्घटना में मृत युवक राजेश शर्मा का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया। प्रबंधन द्वारा अनुरोध किए जाने के बावजूद सुखदेव राम ने पोस्टमार्टम करने से साफ इनकार कर दिया। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।
संकटमोचक बनीं ममता, लगातार किए दो पोस्टमार्टम: इस आपात स्थिति में बिंड मोहल्ला निवासी ममता देवी संकटमोचक बनकर सामने आईं। ममता देवी पिछले करीब 15 वर्षों से विभिन्न निजी अस्पतालों में नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं और कुछ समय पूर्व ही उन्होंने सिविल सर्जन को आवेदन देकर सदर अस्पताल में काम करने की इच्छा जताई थी। आपात स्थिति की सूचना मिलते ही वे तुरंत अस्पताल पहुंचीं और पूरी दक्षता के साथ दुर्घटना में मृत युवक के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके कुछ ही समय बाद लावालौंग क्षेत्र से लाए गए एक अन्य शव का भी उन्होंने सफलतापूर्वक पोस्टमार्टम कर सभी को अचंभित कर दिया।
डॉक्टरों की मौजूदगी में हुई प्रक्रिया, अब मिलेगी स्थायी नियुक्ति: यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार और डॉ. अजहर की देखरेख में विधिवत रूप से संपन्न कराई गई।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने ममता देवी के इस सराहनीय कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा, “ममता देवी ने इस कठिन परिस्थिति में अदम्य साहस और दक्षता का परिचय दिया है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ममता देवी की कार्यकुशलता को देखते हुए शीघ्र ही आउटसोर्सिंग प्रक्रिया के तहत उन्हें पोस्टमार्टम कर्मी के रूप में औपचारिक रूप से नियुक्त किया जाएगा। ममता देवी का यह साहसिक कदम सिर्फ चतरा ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड राज्य के लिए गौरव का विषय है। संभवतः राज्य की पहली महिला पोस्टमार्टम कर्मी के रूप में उनकी यह ऐतिहासिक पहल यह साबित करती है कि महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं।
भोज्या डूबने कांड के बाद पोस्टमार्टम में अवैध वसूली का आरोप, जांच समिति गठित





















Total Users : 923213
Total views : 2669711