थाने में तैनात इंस्पेक्टर पर पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप, कोर्ट ने कहा- “45% दिव्यांग द्वारा मारपीट कर भागना प्रथम दृष्टया असंभव
वाराणसी/जौनपुर न्यूज स्केल : उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जौनपुर जिले के थाना चंदवक में तैनात इंस्पेक्टर क्राइम बृजेश कुमार सिंह पर खाकी का खौफ दिखाकर एक 45 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्र को फर्जी मुकदमे में फंसाने और विवेचना (जांच) को प्रभावित करने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने अपनी पत्नी के ग्राम प्रधान चुनाव में मिले राजनीतिक समर्थन का कर्ज उतारने के लिए पुलिस की वर्दी को ही पैरोकार बना दिया है।
ऑडियो में धमकी: “10 मिनट लगते हैं काला बनाने में” मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत के मुताबिक, इंस्पेक्टर बृजेश सिंह ने मुख्य आरोपी दिव्यांशु दुबे को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर अनैतिक दबाव बनाया। इस मामले में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसमें इंस्पेक्टर को पीड़ित पक्ष को धमकाते हुए साफ सुना जा सकता है: “पचासों साल लग जाते हैं इस सफेदी को लाने में, ये काला क्या है, 10 मिनट लगते हैं काला बनाने में।” यह धमकी सीधे तौर पर पुलिस के रसूख का दुरुपयोग कर एक मेधावी छात्र के भविष्य को अंधकार में धकेलने की मंशा को दर्शाती है।
पत्नी के चुनाव का कर्ज उतारने के लिए खाकी का दुरुपयोग! शिकायतकर्ता का दावा है कि इंस्पेक्टर बृजेश सिंह की पत्नी के ग्राम प्रधान चुनाव में आरोपी दिव्यांशु दुबे के परिवार ने राजनीतिक और जमीनी समर्थन दिया था। आरोप है कि उसी एहसान का बदला चुकाने के लिए इंस्पेक्टर ने न केवल पीड़ित परिवार को जबरन सुलह के लिए मजबूर किया, बल्कि अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर वाराणसी के चितईपुर थाने की विवेचना में अवैध हस्तक्षेप किया और दिव्यांग छात्र सर्वेश त्रिपाठी के विरुद्ध एक मनगढ़ंत और फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया।
वाराणसी न्यायालय ने दी अग्रिम जमानत, पुलिस की थ्योरी को नकारा इस मामले में माननीय अपर सत्र न्यायाधीश, वाराणसी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी बनाए गए छात्र सर्वेश त्रिपाठी को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि:
आरोपी बनाया गया छात्र सर्वेश त्रिपाठी 45 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग है।
ऐसे में विपक्षी द्वारा लगाया गया यह आरोप कि ‘छात्र ने मारपीट की और भाग गया’, प्रथम दृष्टया पूरी तरह असंभव और निराधार प्रतीत होता है।
न्यायालय ने यह भी माना कि यह मुकदमा पुरानी रंजिश और द्वेष की भावना से प्रेरित है, और पूर्व में पुलिस द्वारा अनुचित दबाव बनाकर पीड़ित से जबरन सुलहनामा लिखवाया गया था।
SIT जांच और इंस्पेक्टर के निलंबन की मांग एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपराधी को संरक्षण देने और एक दिव्यांग छात्र के उत्पीड़न का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने मानवाधिकार आयोग और प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश से गुहार लगाते हुए निम्नलिखित मांगें की हैं:
साक्ष्यों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ रोकने के लिए इंस्पेक्टर बृजेश कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए राजपत्रित अधिकारियों की एसआईटी (SIT) गठित की जाए।
वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराई जाए ताकि पुलिस की धमकी और सच्चाई दुनिया के सामने आ सके।




















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