
अगर आरपीएफ और सीआईबी की टीम समय पर सक्रिय नहीं होती, तो 11 मासूम बच्चे सैकड़ों किलोमीटर दूर तमिलनाडु की फैक्ट्री में बाल मजदूरी करने को मजबूर हो जाते। पैसों के लालच में एक तस्कर इन नाबालिगों को अलेप्पी एक्सप्रेस से ले जा रहा था।
धनबाद। बाल तस्करी और बाल मजदूरी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत धनबाद रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी कार्रवाई में 11 नाबालिगों को तमिलनाडु ले जाए जाने से पहले ही बचा लिया गया। आरपीएफ और सीआईबी की सतर्कता ने इन मासूमों को शोषण की अंधेरी दुनिया में धकेले जाने से रोक दिया। जानकारी के अनुसार, बिहार के मधेपुरा जिले के रहने वाले 11 नाबालिगों को मजदूरी के लिए तमिलनाडु ले जाया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने पर अलेप्पी एक्सप्रेस की जांच शुरू की गई। इसी दौरान स्टेशन के मुख्य द्वार पर एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर पूछताछ की गई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पकड़ा गया तस्कर खगेश कुमार, मधेपुरा के गम्हरिया का निवासी है। पूछताछ में उसने बताया कि उसका चाचा मानव कुमार तमिलनाडु के मदुरई स्थित एक बोतल निर्माण कंपनी में काम करता है। उसी कंपनी में मजदूरों की मांग थी। खगेश को बच्चों को ले जाने के एवज में पैसे का लालच दिया गया था। उसने गांव के गरीब परिवारों के बच्चों को एक-एक हजार रुपये का प्रलोभन देकर अपने साथ चलने को तैयार कर लिया।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच में सामने आया कि बच्चों के आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर उनकी उम्र बढ़ाई गई थी। धनबाद के आधार सेवा केंद्र में जांच के दौरान खुलासा हुआ कि नाबालिगों को बालिग दर्शाने के लिए दस्तावेजों में बदलाव किया गया था, ताकि उनसे जोखिम भरे काम कराए जा सकें। इस अभियान में आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय प्रकाश, सीआईबी इंस्पेक्टर अरविंद कुमार राम समेत कई अधिकारियों की अहम भूमिका रही। सभी नाबालिगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है और आरोपी के खिलाफ रेल थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक मासूम बच्चों को गरीबी और लालच के जाल में फंसाकर शोषण के लिए भेजा जाता रहेगा? केवल कानून नहीं, समाज की जागरूकता और सख्ती ही इस अपराध पर अंकुश लगा सकती है।
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