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हाथियों का कहर: छह लोगों की दर्दनाक मौत, डेढ़ घंटे तक मचा रहा तांडव

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जंगल और इंसान के बीच की दूरी जब सिमटने लगती है, तो त्रासदी जन्म लेती है। विकास, खनन और अतिक्रमण के बीच वन्यजीवों के रास्ते बाधित होते हैं—और फिर एक रात अचानक सब कुछ बदल जाता है। हजारीबाग के एक छोटे से गांव ने गुरुवार की रात वही भयावह दृश्य देखा, जिसे शायद आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।

हजारीबाग: गुरुवार की देर रात हाथियों का एक झुंड गोंदवार गांव में घुस आया और करीब डेढ़ घंटे तक उत्पात मचाता रहा। इस दर्दनाक घटना में दो पुरुष, दो महिलाएं और दो मासूम बच्चों समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई ग्रामीण किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने गांव में प्रवेश करते ही सबसे पहले बिजली के खंभे को गिरा दिया, जिससे पूरे गांव में अंधेरा छा गया। अफरातफरी के बीच हाथियों ने कच्चे मकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

सबसे पहले धनेश्वर राम के घर पर हमला हुआ। दीवार तोड़कर हाथी अंदर घुस आए। परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन हाथियों ने उन्हें दौड़ाकर कुचल दिया। इसके बाद सामने स्थित सूरज भुईयां के घर में भी हाथी घुस गया। बाहर भागने की कोशिश कर रहे सूरज भुईयां, उनकी बहू सबिता देवी और दुधमुंहे बच्चे अनुराग को भी हाथियों ने नहीं छोड़ा। खाट पर सो रही बच्ची सजना भी हमले का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हाथी पूरे गांव में इधर-उधर दौड़ते रहे। लोग खेतों और पड़ोसी घरों में छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते रहे। रोहित राम ने बताया कि एक हाथी ने उन्हें सूंड में लपेटने की कोशिश की, लेकिन वे किसी तरह छूटकर अंधेरे में भाग निकले।

दिव्यांग बुजुर्ग बीरू मांझी ने बताया कि शोर सुनते ही वे लकड़ी की सीढ़ी के सहारे छत पर चढ़ गए और ऊपर से भयावह मंजर देखते रहे। बिजली गुल थी और गांव में चीख-पुकार मची हुई थी। करीब डेढ़ घंटे बाद हाथियों का झुंड जंगल की ओर लौट गया। इसके बाद ग्रामीण अपने ठिकानों से बाहर निकले तो कई शव घरों और रास्तों के पास पड़े मिले। घायल सूरज भुईयां को अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां उनकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के समय कोई प्रभावी रोकथाम नहीं हो सकी।

सुबह होते-होते गांव में सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल और मांडू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो ने घटनास्थल पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीति की जरूरत है। हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर अवरुद्ध हो रहे हैं और अवैध खनन से उनके आश्रय स्थल नष्ट हो रहे हैं, जिसके कारण वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। विधायक ने भी अवैध खनन पर रोक और हाथियों के सुरक्षित आवास की व्यवस्था की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल मुआवजा और आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। गांव में अब भी हाथियों के लौटने का डर बना हुआ है और रात होते ही दहशत फैल जाती है। गोंदवार की यह भयावह रात एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष के गंभीर सवाल खड़े कर गई है।

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