राज्य कैबिनेट का बड़ा फैसला; नए कानून के लागू न होने से ग्रामीण इलाकों में पैदा हुआ रोजगार का भारी संकट, ‘नीतिगत शून्य’ के खिलाफ लड़ेगी कानूनी लड़ाई
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म कर नए कानून को लाने के मामले में कर्नाटक और केंद्र सरकार के बीच तनातनी अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है। कर्नाटक सरकार ने केंद्र द्वारा लाए गए नए ‘VB-G RAM G एक्ट, 2025’ को चुनौती देते हुए और मनरेगा की बहाली की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने का फैसला किया है। राज्य का तर्क है कि नए कानून को लागू करने में केंद्र की भारी लेटलतीफी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो गया है ।
‘नियम बने न दिशा-निर्देश, खालीपन से लाखों परिवार प्रभावित’ कर्नाटक सरकार के अनुसार, संसद ने मनरेगा को हटाकर उसकी जगह ‘वीबी-जी राम-जी एक्ट, 2025’ (विकसित भारत-रोजगार एवं उपभोक्ता मिशन ग्रामीण) पारित तो कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस नए कानून को अधिसूचित (Notify) ही नहीं किया है । राज्य का साफ कहना है कि इसके लिए न तो कोई नियम-कानून बनाए गए हैं, न दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और न ही मनरेगा की जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू की गई है । इस ‘नीतिगत निर्वात’ (Policy Vacuum) के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है और रोजगार की आस में बैठे लाखों गरीब परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं ।
Also Read:बिहार में सम्राट सरकार का महा-विस्तार: नीतीश के बेटे बने स्वास्थ्य मंत्री, CM ने गृह रखा अपने पास; देखें मंत्रियों की पूरी लिस्ट!
Also Read: तमिलनाडु में थलपति विजय का राज: TVK को मिला बहुमत का आंकड़ा, 11 लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ!
कैबिनेट में लिया गया सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला इस गंभीर मुद्दे को लेकर 7 मई को कर्नाटक सरकार की कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी । बैठक के बाद कानून मंत्री एच.के. पाटिल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने वीबी-जी राम-जी एक्ट को चुनौती देने का फैसला किया है । उन्होंने कहा, “हम इस कानून को लेकर कोर्ट जाएंगे। हमारी मांग है कि ग्रामीण उद्योगों की रक्षा हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि रोजगार से जुड़े कामगार प्रभावित न हों।” मनरेगा: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ गौरतलब है कि मनरेगा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती रही है। यह योजना ग्रामीण परिवारों को हर साल कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देती थी । केंद्र द्वारा इसे खत्म कर नया एक्ट लाने के फैसले से कई राज्यों में पहले से ही भारी असंतोष है । कर्नाटक का तर्क है कि नए कानून को लागू करने में केंद्र की देरी से बैंकों और वित्तीय संस्थानों में भी असमंजस पैदा हुआ है । राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट से यह मांग करेगी कि जब तक नया कानून पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक मनरेगा के तहत इस साल की कार्ययोजना बनाने और उसे लागू करने की अनुमति दी जाए ।





















Total Users : 961399
Total views : 2720900