भाड़े की गाड़ियों से प्रतिदिन विद्यालय पहुंच रहे गुरुजी; एक शिक्षक की सड़क हादसे में हो चुकी है मौत, फिर भी नहीं चेत रहा शिक्षा विभाग
मयूरहंड (चतरा) | न्यूज़ स्केल लाइव
चतरा जिले में सरकारी कार्य-संस्कृति को सुधारने और पदाधिकारियों/कर्मियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त (DC) रवि आनंद ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त द्वारा पत्रांक- 415/गो. और 416/गो. के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया गया है कि बिना पूर्व सूचना और स्वीकृत अवकाश के कोई भी कर्मी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। लेकिन मयूरहंड प्रखंड के शिक्षा विभाग में इन आदेशों का कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
स्कूलों के बाहर खड़ी रहती हैं ‘अप-डाउन’ वाली गाड़ियां मयूरहंड प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अधिकांश शिक्षक जिला मुख्यालय या कार्यक्षेत्र में रहने के बजाय हजारीबाग और अन्य दूरस्थ स्थानों से प्रतिदिन आवागमन कर रहे हैं। प्रखंड के विद्यालयों के समीप प्रतिदिन भाड़े पर चलने वाली निजी गाड़ियां खड़ी मिल जाएंगी, जो शिक्षकों को लाने और ले जाने का काम करती हैं। मयूरहंड में इस तरह की तीन से चार गाड़ियां प्रतिदिन शिक्षकों का ‘सिंडिकेट’ चला रही हैं। यदि जिला प्रशासन औचक निरीक्षण करे, तो इस सच की पुष्टि आसानी से की जा सकती है।
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हादसे में जान गंवा चुके हैं शिक्षक चंद्रशेखर आजाद मुख्यालय में नहीं रहने और प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने की मजबूरी शिक्षकों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। इसी माह प्रखंड के सोकी उत्क्रमित मध्य विद्यालय के शिक्षक चंद्रशेखर आजाद का बरकट्ठा में सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया। वे भी प्रतिदिन दोपहिया/चारपहिया वाहन से आवागमन कर रहे थे। बरसात और आने वाले जाड़े के मौसम में घने कोहरे के कारण ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।
HRA लेने के बावजूद नियमों की अनदेखी सरकार द्वारा शिक्षकों को मुख्यालय में रहने के लिए विधि सम्मत मकान किराया भत्ता (HRA) दिया जाता है। नियमों के अनुसार बेहतर पठन-पाठन और आपातकालीन ड्यूटी के लिए इनका मुख्यालय में रहना अनिवार्य है। लेकिन मयूरहंड में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
DEO की चुप्पी पर उठ रहे सवाल इस गंभीर मामले की ओर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) दिनेश मिश्र का ध्यानाकर्षण कराया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि शिक्षकों के मुख्यालय में रहने संबंधी आदेश जल्द जारी किए जाएंगे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग को और भी शिक्षकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की प्रतीक्षा है? क्या किसी बड़े जान-माल के नुकसान के बाद ही विभाग की तंद्रा भंग होगी? अब देखना यह है कि उपायुक्त के सख्त आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कब और क्या कदम उठाते हैं।






















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