24 अप्रैल से 11 मई तक जिले भर में चलेगा पेयजल समस्या निवारण अभियान, वार्ड से लेकर पंचायतों तक लग रहे हैं विशेष शिविर, युद्धस्तर पर हो रही खराब चापाकलों की मरम्मत
चतरा (झारखंड), न्यूज स्केल : झारखंड के चतरा जिले में भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट से ग्रामीणों को निजात दिलाने के लिए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त (DC) रवि आनंद के नेतृत्व में जिले में ‘पेयजल समस्या निवारण पखवाड़ा’ का शानदार आगाज हो गया है। 24 अप्रैल से 11 मई 2026 तक चलने वाले इस महाअभियान की शुरुआत चतरा प्रखंड की लेम पंचायत से की गई।
कार्यक्रम के पहले दिन डीसी रवि आनंद ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। पंचायत के विभिन्न पेयजल संकटग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करने के दौरान वे चिलचिलाती धूप में लगभग 1 किलोमीटर तक पैदल चलकर लेम पंचायत के भुइयां टोला पहुंचे। वहां उन्होंने सीधा ग्रामीणों से संवाद किया, उनकी जल संकट से जुड़ी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर उनका त्वरित निष्पादन करने का सख्त निर्देश दिया। लेम पंचायत पहुंचे उपायुक्त, उप विकास आयुक्त (DDC) और बीडीओ हरिनाथ महतो की उपस्थिति में प्राथमिकता आधारित योजनाओं के चयन के लिए एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इसमें पेयजल संसाधनों के सुदृढ़ीकरण और पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध आधारभूत संरचना के अनुरूप योजनाओं का चयन किया गया।
इस अभियान के तहत प्रखंड विकास पदाधिकारी और पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के अधिकारियों की देखरेख में पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान की जा रही है।
प्रथम दिन (24 अप्रैल): चतरा प्रखंड के लेम व जांगी, गिद्धौर, हंटरगंज, प्रतापपुर, कुंदा, लावालौंग, सिमरिया, इटखोरी, मयूरहंड, कान्हाचट्टी और टंडवा की विभिन्न पंचायतों के साथ-साथ नगर परिषद चतरा के वार्ड 1 व 2 में शिविर लगाए गए।
द्वितीय दिन (25 अप्रैल): रोस्टर के अनुसार चतरा के गंघरिया व ब्रह्मणा, हंटरगंज के औरु व बलुरी, प्रतापपुर के सिजुआ समेत कई अन्य प्रखंडों की पंचायतों और चतरा नगर परिषद के वार्ड 3 व 4 में भी शिविर लगाकर आमजनों की पानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
किसी ग्रामीण को नहीं जूझना पड़ेगा जल संकट से: DC इस मौके पर उपायुक्त रवि आनंद ने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह है कि इस गर्मी में किसी भी ग्रामीण को पानी की किल्लत से न जूझना पड़े। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाकर समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।


















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