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समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC) 2026 विधानसभा में पेश

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विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए एक समान कानून का प्रस्ताव

गांधीनगर, गुजरात। राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में ‘गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026’ पेश किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवन संबंधों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है। यह विधेयक राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है, जिसने हाल ही में अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। विधेयक के पारित होने पर गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा।

प्रस्तावित कानून पूरे गुजरात में लागू होगा और राज्य के बाहर रहने वाले निवासियों पर भी प्रभावी रहेगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और कुछ पारंपरिक अधिकारों वाले समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

विधेयक के अनुसार, विवाह को तभी वैध माना जाएगा जब विवाह के समय किसी भी पक्ष का जीवनसाथी जीवित न हो, यानी द्विविवाह पर पूर्ण रोक का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, सह-जीवन संबंधों के पंजीकरण और उनके समापन की औपचारिक प्रक्रिया भी प्रस्तावित की गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता आधारित न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है। वहीं, विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

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