डूबते सूर्य को अर्घ्य, बुधवार को उगते सूर्य को अर्पण के साथ पारण
गिद्धौर/हंटरगंज/पत्थलगड़ा (चतरा)। जिले के गिद्धौर, पत्थलगड़ा एवं हंटरगंज समेत विभिन्न प्रखंडों में लोक आस्था का महापर्व चौती छठ पूरे श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चार दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को छठव्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पत्थलगड़ा प्रखंड के बरवाडीह, बेलहर, नावाडीह, बकुलिया नदी, नोनगांव, तेतरिया सहित विभिन्न नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। छठव्रतियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सूर्य नारायण से आशीर्वाद मांगा। गंगा पूजा के साथ संध्या अर्घ्य अर्पित किया गया, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। वहीं गिद्धौर प्रखंड के रामसागर, दुआरी, गांगपुर, बारिसाखी, सिंदुआरी, पेक्सा, पहरा, पिंडारकोन सहित विभिन्न छठ घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। पारंपरिक मान्यता के अनुसार संध्याकालीन सूर्य उपासना से जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि प्राप्त होती है और नकारात्मकता का नाश होता है। हंटरगंज प्रखंड के पांडेपुरा छठ घाट पर भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। छठव्रती पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे सूप में केला, नारियल, घाघरा नींबू, मौसमी फल, कच्ची हल्दी, मूली एवं घर में तैयार शुद्ध प्रसाद लेकर घाट पहुंचे और अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर गूंजते लोकगीतों और सामूहिक पूजा-अर्चना ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस वर्ष विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। प्रखंड प्रशासन एवं छठ पूजा समितियों द्वारा घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं, जिससे व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही इस चार दिवसीय चौती छठ महापर्व का समापन होगा तथा प्रसाद वितरण किया जाएगा।






















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