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500 साल पुरानी अनोखी परंपरा, माँ के चरणों से पान का पत्ता गिरे बिना नहीं होता विसर्जन!

On: March 24, 2026 1:21 AM
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“झारखंड की देवभूमि में आस्था और विश्वास का एक ऐसा केंद्र, जहाँ सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जीवित हैं।

लातेहार (चंदवा): झारखंड की देवभूमि में आस्था और विश्वास का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जीवित हैं और आधुनिकता भी उन्हें डिगा नहीं पाई है। लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड के नगर ग्राम में स्थित माँ उग्रतारा नगर भगवती मंदिर एक ऐसा ही आस्था का केंद्र है, जो न केवल धार्मिक आस्था को समेटे हुए है, बल्कि अपने 500 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और एक बेहद अनोखी परंपरा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ की सबसे निराली और दिव्य परंपरा यह है कि जब तक माता के चरणों में चढ़ाया गया पान का पत्ता खुद-ब-खुद धरती पर नहीं गिर जाता, तब तक 16 दिनों तक चलने वाली नवरात्र पूजा का विसर्जन संपन्न नहीं माना जाता।

माता का आदेश: एक पान के पत्ते में छिपा रहस्य

यह मंदिर परंपराओं को मानने के मामले में अनूठा है। मंदिर के पुजारी विवेकानन्द ने बताया कि यहाँ नवरात्र की पूजा 9 दिनों की बजाय 16 दिनों तक चलती है, जो भारत के बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलता है। नवरात्रि के समापन के बाद, दशमी के दिन, पुजारी माता के चरणों में श्रद्धाभाव से एक पान का पत्ता चढ़ाते हैं। इसके बाद, पूरे मंदिर परिसर में एक गहरी खामोशी और श्रद्धा का माहौल छा जाता है। भक्तगण और पुजारी, सभी एकटक पान के पत्ते की ओर देखते रहते हैं और उसके गिरने का इंतजार करते हैं। मान्यता है कि यह पत्ता जब खुद धरती पर गिरता है, तो यह साक्षात माँ भगवती का आदेश होता है। माँ का आदेश मिलने के बाद ही विसर्जन की प्रक्रिया आरंभ की जाती है।

बलि प्रथा पर भी माँ का आदेश

इस मंदिर में एक और कड़ी परंपरा है। माँ उग्रतारा मंदिर में नवरात्र में काड़ा (भैंसा) बलि की प्रथा है। लेकिन, जब तक पान का पत्ता गिरकर विसर्जन का आदेश नहीं दे देता, तब तक मंदिर में बकरा बलि की भी शुरुआत नहीं होती। माँ से विसर्जन का आदेश मिलने के बाद ही बकरा बलि आरंभ की जाती है।

ऐतिहासिक गौरव: अहिल्याबाई होल्कर और टोरी रियासत का कनेक्शन

माँ उग्रतारा नगर भगवती मंदिर का इतिहास अत्यंत समृद्ध और ऐतिहासिक है। जनश्रुतियों के अनुसार, टोरी रियासत के राजा पीतांबर नाथ शाही को स्वप्न में दर्शन देने के बाद माता की मूर्तियां पास के ही मनकेरी तालाब से प्राप्त हुई थीं। यह भी बताया जाता है कि इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने भी यहाँ मत्था टेका था और मंदिर के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

सर्वधर्म समभाव की प्रतीक

पलामू गजट में भी इस प्राचीन मंदिर का जिक्र मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि माँ उग्रतारा नगर भगवती के प्रति सभी धर्म के लोगों की गहरी आस्था है। सालों भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

News Scale Live की ग्राउंड रिपोर्ट

सीधे मंदिर परिसर से रिपोर्ट कर रहे हमारे संवाददाता पारस कुमार इंद्र गुरु ने इस दिव्य माहौल और अनोखी परंपरा का अनुभव किया। पारस की रिपोर्ट के अनुसार, “यह मंदिर झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक चमकता हुआ सितारा है। यहाँ आकर यह महसूस होता है कि आस्था और विश्वास की ताकत कितनी बड़ी होती है, जो सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी जीवंत रखे हुए है।”

आप भी देखें, News Scale Live की यह विशेष रिपोर्ट, सिर्फ़ हमारे चैनल पर, जहाँ ‘भरोसे की पहचान’ है।

(रिपोर्टर: पारस कुमार इंद्र गुरु, सीधे मंदिर से)

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