विद्यालयों की बाउंड्री वॉल निर्माण से जुड़े संवेदकों ने लगाए गंभीर आरोप, एकरारनामा से भुगतान तक कमीशन मांगने का दावा
मयूरहंड(चतरा)। जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर कमीशनखोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार मयूरहंड प्रखंड में डीएमएफटी योजना के तहत विद्यालयों में बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए संविदा आमंत्रित कर संबंधित विभाग द्वारा संवेदकों को कार्य आवंटित किया गया है। आरोप है कि कार्य का एकरारनामा कराने से लेकर भुगतान प्राप्त करने तक संवेदकों से अलग-अलग स्तर पर कमीशन की मांग की जा रही है।
नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ संवेदकों ने आरोप लगाया कि एकरारनामा कराने के लिए लगभग 13 से 15 प्रतिशत तक की ‘पगड़ी’ मांगी जा रही है। उनका दावा है कि निर्धारित राशि जमा करने के बाद ही एकरारनामा हो पा रहा है। जो संवेदक यह राशि देने से इनकार करते हैं, उनका एकरारनामा नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
भुगतान के लिए भी 8 से 10 प्रतिशत कमीशन का आरोप
संवेदकों के अनुसार मामला केवल एकरारनामा तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि प्राक्कलन के अनुरूप कार्य पूरा करने के बाद भुगतान लेने के लिए भी लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है। संवेदकों ने दावा किया कि नीचे से ऊपर तक कमीशन का कथित खेल चलता है और एक योजना में उन्हें कुल मिलाकर 23 से 24 प्रतिशत या उससे अधिक राशि कमीशन के रूप में देने की स्थिति बनती है।
संवेदकों का आरोप है कि यदि निर्धारित कमीशन नहीं दिया जाता है तो संबंधित अधिकारी कार्य में कमियां निकाल देते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी कथित दबाव के कारण कमीशन की राशि पहले ही देने की बात भी उन्होंने कही है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल विकास योजनाओं की गुणवत्ता को लेकर उठ रहा है। संवेदकों का कहना है कि यदि योजना की राशि का बड़ा हिस्सा कथित कमीशन में चला जाए तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। डीएमएफटी योजना के तहत जिला परिषद विभाग की देखरेख में संचालित योजनाओं की गुणवत्ता की पड़ताल के दौरान कुछ संवेदकों से बातचीत में ये आरोप सामने आने की बात कही गई है।
हालांकि, कमीशन मांगने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सवाल यह भी है कि यदि आरोप सही हैं तो विकास योजनाओं की राशि के कथित दुरुपयोग और निर्माण गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई होगी।























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