समानांतर नए पुल का निर्माण करीब एक दशक से अधूरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
चतरा/इटखोरी। चतरा जिले को चौपारण स्थित जीटी रोड से जोड़ने वाले इटखोरी-चतरा मुख्य मार्ग पर बक्सा नदी के ऊपर बना ऐतिहासिक बक्सा पुल आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। करीब सौ वर्ष से अधिक पुराना यह पुल वर्तमान में अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। पुल की स्थिति को देखते हुए इस पर सुरक्षित आवागमन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रतिदिन छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन जारी है।
1925 के आसपास निर्मित पुल ने पूरे किए सौ साल से अधिक
स्थानीय जानकारी के अनुसार बक्सा पुल का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल में करीब वर्ष 1925 के आसपास कराया गया था। यानी यह पुल अपनी निर्माण अवधि के सौ वर्ष से अधिक का समय पूरा कर चुका है। उस दौर में यातायात का दबाव सीमित था, लेकिन वर्तमान समय में इस मार्ग पर वाहनों की संख्या और भार दोनों में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में एक सदी पुराने पुल पर बढ़ता यातायात उसकी सुरक्षा और क्षमता को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
टूटी रेलिंग और वाहनों के दबाव में पुल का लचकना चिंता का विषय
बक्सा पुल की रेलिंग कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। पुल की जर्जर अवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारी वाहनों के गुजरने के दौरान पुल में लचक महसूस होने की बात स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही है। पुल के दोनों ओर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का अभाव भी दुर्घटना की आशंका को बढ़ाता है।
यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ता है या पुल के किनारे से कोई व्यक्ति अथवा वाहन नीचे गिरता है, तो गंभीर जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बरसात के मौसम में नदी में पानी का बहाव बढ़ने पर जोखिम और अधिक गंभीर हो जाता है।
खतरनाक घोषित होने के बाद भी आवागमन पर सवाल
पुल की जर्जर स्थिति को लेकर पूर्व में प्रशासन की ओर से सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए जाने की जानकारी है। भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और चेतावनी के बावजूद यदि व्यवहारिक स्तर पर वाहनों का आवागमन जारी रहता है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुल की स्थिति इतनी गंभीर है और भारी वाहनों से खतरा उत्पन्न हो सकता है, तो वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना इस मार्ग पर आवागमन को पूरी तरह नियंत्रित क्यों नहीं किया जा रहा है?
समानांतर नया पुल करीब दस वर्षों से अधूरा
बक्सा पुल की समस्या का स्थायी समाधान नया पुल हो सकता था। पुराने पुल के समानांतर नए पुल का निर्माण शुरू भी कराया गया, लेकिन करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। नया पुल आखिर किन कारणों से लंबित है, निर्माण कार्य कब और क्यों रुका तथा इसे पूरा करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है—इन सवालों का स्पष्ट जवाब स्थानीय लोगों को अब तक नहीं मिल पाया है।
एक ओर पुराना पुल लगातार कमजोर होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके समानांतर बनने वाला नया पुल वर्षों से अधूरा पड़ा है। यही स्थिति लोगों के आक्रोश का प्रमुख कारण बन रही है।
चतरा और चौपारण के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग
इटखोरी-चतरा मार्ग केवल स्थानीय आवागमन का रास्ता नहीं है, बल्कि यह चतरा को चौपारण के माध्यम से जीटी रोड से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस कारण इस सड़क पर स्थानीय वाहनों के अलावा लंबी दूरी का यातायात भी निर्भर करता है। पुल के क्षतिग्रस्त होने या अचानक यातायात बंद होने की स्थिति में इसका सीधा प्रभाव चतरा और आसपास के क्षेत्रों की सड़क संपर्क व्यवस्था पर पड़ सकता है।
मां भद्रकाली मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण
इटखोरी स्थित प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर इस मार्ग के महत्व को और बढ़ा देता है। मंदिर में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी इस मार्ग और बक्सा पुल की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। किसी बड़े हादसे की स्थिति में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी प्रभावित हो सकते हैं।
बड़ा सवाल—हादसे का इंतजार या समय रहते समाधान?
बक्सा पुल की मौजूदा स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सौ वर्ष से अधिक पुराने पुल की संरचनात्मक सुरक्षा, भारी वाहनों का दबाव, टूटी रेलिंग, पुल के लचकने की शिकायत और समानांतर नए पुल का वर्षों से अधूरा रहना—ये सभी परिस्थितियां मिलकर संभावित खतरे की ओर संकेत करती हैं।
ऐसे में आवश्यकता केवल चेतावनी जारी करने की नहीं, बल्कि पुल की तकनीकी और संरचनात्मक जांच, भारी वाहनों के आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण, आवश्यक सुरक्षा अवरोध लगाने और अधूरे नए पुल के निर्माण को शीघ्र पूरा कराने की है। संबंधित विभाग और प्रशासन यदि समय रहते ठोस कदम उठाते हैं तो संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है। सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार तंत्र किसी हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले बक्सा पुल की समस्या का स्थायी समाधान करेगा?


























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