WhatsApp Group Join Now
प्रतापपुर (चतरा)। सरकारी अभिलेखों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत एक आवास को पूर्ण दिखाया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार लाभुक को योजना की कुल 1 लाख 30 हजार रुपये की राशि तीन किस्तों में प्रदान कर दी गई है तथा निरीक्षण प्रक्रिया भी पूरी बता दी गई है। लेकिन जब इस आवास की जमीनी हकीकत सामने आई, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आई। स्थल पर देखा गया कि आवास पूरी तरह तैयार नहीं है। केवल दीवारें खड़ी की गई हैं और छत की ढलाई की गई है, जबकि दरवाजा, खिड़की, फर्श, प्लास्टर समेत अन्य आवश्यक कार्य अब भी अधूरे हैं। मकान रहने योग्य स्थिति में नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब निर्माण कार्य अधूरा है, तो निरीक्षण रिपोर्ट में इसे पूर्ण कैसे दर्शा दिया गया। क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों पर हुआ? क्या बिना वास्तविक सत्यापन के रिपोर्ट अपलोड कर दी गई? या फिर निगरानी तंत्र में इतनी लापरवाही है कि अधूरा घर भी पूर्ण मान लिया जाता है? यह मामला केवल एक लाभुक तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि अधूरे आवास को कागजों में पूरा दिखाया जा सकता है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि किन परिस्थितियों में इस आवास को पूर्ण घोषित किया गया। विकास का असली पैमाना रिपोर्ट नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला परिणाम होता है। जब मकान अधूरा हो, तो उसे पूर्ण बताना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।



















Total Users : 939799
Total views : 2692245