19 अप्रैल को 200 कुंडीय यज्ञ के साथ होगा भव्य समापन, संतों व श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी
पुष्कर (राजस्थान), न्यूज स्केल डेस्क: राजस्थान की पवित्र नगरी पुष्कर में यज्ञ सम्राट स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे 43 दिवसीय ‘शत गायत्री पुरश्चरण यज्ञ’ अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। जैसे-जैसे 19 अप्रैल की समापन तिथि नजदीक आ रही है, श्रद्धालुओं का रेला पुष्कर की ओर उमड़ पड़ा है। सोमवार को न्यूज स्केल राजस्थान प्रभारी रमेश शर्मा ने यज्ञ स्थल का जायजा लिया और बताया कि आगामी 19 अप्रैल को 200 कुंडीय महायज्ञ का भव्य समापन होगा।
सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यज्ञ स्थल पहुंचकर परिक्रमा की तथा यजमानों और पुरोहितों से मुलाकात की। उनके आगमन पर महायज्ञ के प्रणेता स्वामी प्रखर महाराज ने उनका भव्य स्वागत किया। संत निवास में शंकराचार्य का विधिवत चरण पादुका पूजन भी किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के उद्योगपति नरेंद्र शर्मा ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन एवं आरती की।
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि देश में मंदिरों को आय के साधन के रूप में देखा जा रहा है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के पूजा स्थल केवल आस्था और साधना के केंद्र हैं, न कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे अन्य धर्मों के पूजा स्थलों को स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाता है, वैसे ही हिंदू मंदिरों को भी स्वतंत्र रूप से संचालित करने का अधिकार मिलना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह कहना कठिन है कि देश में गौ हत्या पूरी तरह बंद है। इससे पूर्व स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ भी महायज्ञ स्थल पहुंचे, जहां संत प्रखर महाराज ने उनका स्वागत किया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग यज्ञ में शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। पुष्कर में आयोजित यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य भी कर रहा है।






















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