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बाल अधिकारों के संरक्षण में NCPCR की बड़ी छलांग: एक साल में 36,000 शिकायतों का निपटारा और 4100 बच्चों का रेस्क्यू

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तकनीक से सुरक्षा: नए पोर्टल्स का आगाज, बाल तस्करी के खिलाफ ‘आजादी’ का बिगुल

न्यूज स्केल डेस्क: भारत में हर बच्चे को सुरक्षित और गरिमामय बचपन सुनिश्चित करने के अपने संकल्प के साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में आयोग ने बाल सुरक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक मील के पत्थर स्थापित किए हैं।

न्याय की ओर कदम: शिकायतों के अंबार से मुक्ति

NCPCR ने इस वर्ष अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लाते हुए 36,000 से अधिक लंबित शिकायतों का समाधान किया है। यह आयोग के कुल बैकलॉग का लगभग 70% हिस्सा है, जो पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

बाल तस्करी के खिलाफ ‘आजादी’ का बिगुल

‘बाल तस्करी से आजादी’ अभियान के तहत आयोग ने देश के 200 जिलों में सघन अभियान चलाया। इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे:

शिक्षा और स्वास्थ्य: ‘शुगर बोर्ड’ पहल की धूम

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा सराही गई ‘शुगर बोर्ड’ पहल को आयोग ने देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करवाने में सफलता पाई है। इसके दायरे में लगभग 7 लाख स्कूल आए हैं। शिक्षा अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद के कारण यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार को मजबूत कर रही है।

तकनीक से सुरक्षा: नए पोर्टल्स का आगाज

आधुनिक दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए NCPCR ने बड़े पैमाने पर तकनीक का समावेश किया है:

  1. पोर्टल्स का विलय: आयोग के विभिन्न पोर्टल्स को एक साथ मिलाकर उन्हें एक बेहतर और तेज प्लेटफॉर्म पर लाया गया है।

  2. अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार पोर्टल: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नया समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है।

जागरूकता अभियान और कानूनी सुरक्षा

बाल सुरक्षा कानूनों जैसे POCSO एक्ट, जेजे एक्ट (JJ Act), और शिक्षा का अधिकार (RTE) के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय और जिला स्तर पर 61 सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित की गईं। मंत्रालय का सहयोग और विजन: इन सफलताओं के पीछे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मंत्रालय के सचिव का निरंतर प्रोत्साहन और मार्गदर्शन रहा है। आयोग का लक्ष्य स्पष्ट है—भारत के अंतिम छोर पर खड़े बच्चे तक सुरक्षा और अधिकार पहुंचाना।

सौजन्य: NCPCR 

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