बालू नहीं, फिर भी घाट घोषित-अवैध खनन से लोगों का आर्थिक दोहन
मयूरहंड (चतरा)। मयूरहंड प्रखंड क्षेत्र में कैटेगरी-1 बालू घाट के चयन को लेकर गंभीर अनियमितता और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, झारखंड बालू खनन नियमावली 2025 के तहत जिले में चिन्हित 10 बालू घाटों का संचालन निजी, गैर-व्यावसायिक एवं सरकारी योजनाओं के लिए किया जाना है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित पंचायत और स्थानीय निकायों को दी जानी है। आरोप है कि मयूरहंड के अंचल अधिकारी मनीष कुमार द्वारा कैटेगरी-1 बालू घाट के चयन में फर्जी राजस्व प्रतिवेदन तैयार कर जिला को भेजा गया। इसके आधार पर पेटादेरी पंचायत के राजस्व ग्राम धर्मपुर स्थित लेढीया नदी (खाता संख्या 19, प्लॉट संख्या 1121, रकबा 3.70 एकड़) को बालू घाट के रूप में चिन्हित किया गया, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार वहां बालू उपलब्ध ही नहीं है। बताया जा रहा है कि वास्तविक नदी प्लॉट संख्या 1133 में है, जो धर्मपुर ग्राम में नहीं पड़ती। ऐसे में चयनित स्थल पर बालू घाट का अस्तित्व ही नहीं है। इसके कारण पंचायत को अब तक बालू घाट संचालन का अधिकार भी नहीं दिया जा सका। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। सरकार की योजना के तहत ₹100 प्रति 100 घन फीट की दर से बालू उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन अवैध खनन के चलते लोगों को महंगे और मनमाने दामों पर बालू खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खासकर अबुआ आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुक इससे काफी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से क्षेत्र में दिन-रात अवैध खनन और परिवहन जारी है, जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं संबंधित अधिकारी पर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित होगा और आम लोगों का आर्थिक शोषण जारी रहेगा।




















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