मानवता को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। एक नाबालिग लड़की… जो आठ महीने की गर्भवती थी… उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के नाम पर जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने ऑपरेशन कर नवजात को जन्म दिलाया और फिर उसे बेचने की साजिश रच दी। जब लड़की को पुलिस ने बरामद किया, तो उसकी हालत देखकर पूरा सच सामने आ गया। फिलहाल पुलिस ने अस्पताल संचालक, प्रेमी और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
पटना। बिहार की राजधानी पटना के आशियाना नगर स्थित संजीवनी अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल संचालक ने आठ माह की गर्भवती नाबालिग का सिजेरियन ऑपरेशन केवल इसलिए करा दिया ताकि नवजात को उसके प्रेमी और उसकी मां की मदद से मोटी रकम में बेचा जा सके। मामले का खुलासा तब हुआ जब नाबालिग के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उसे फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र के खोजा इमली इलाके से बरामद किया। नाबालिग को जब थाने लाया गया तो उसकी हालत गंभीर थी और अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। पूछताछ में पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद डीएसपी सचिवालय अनु कुमारी के निर्देश पर पुलिस ने अस्पताल संचालक राकेश कुमार सिन्हा, नाबालिग के प्रेमी और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही संजीवनी अस्पताल को सील कर दिया गया।
पैसों के लिए नवजात बेचने की थी योजना
पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग अपने प्रेम संबंध के कारण गर्भवती हो गई थी। जब उसने यह बात अपने प्रेमी को बताई तो उसने अपनी मां के साथ मिलकर उसे अनीसाबाद स्थित संजीवनी अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने पहले गर्भपात से इनकार करते हुए बताया कि आठ माह की गर्भावस्था में केवल ऑपरेशन से ही बच्चा निकाला जा सकता है। इसके बाद अस्पताल संचालक ने प्रस्ताव दिया कि यदि नवजात उसे सौंप दिया जाए तो वह मुफ्त में ऑपरेशन कर देगा। समझौते के बाद ऑपरेशन कर नवजात को निकाल लिया गया और उसे खगौल निवासी एक व्यक्ति को सौंप दिया गया, जिसे बच्चे की देखभाल करने और खरीददार ढूंढने की जिम्मेदारी दी गई थी।
अस्पताल संचालक की निशानदेही पर पुलिस ने नवजात को बरामद कर लिया। फिलहाल बच्चे को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस इस मामले को अवैध अस्पतालों के जरिए नवजात तस्करी के बड़े नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल संचालक द्वारा अवैध और खतरनाक मेडिकल प्रैक्टिस किए जाने के कारण उसके सभी लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। साथ ही संबंधित डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के लाइसेंस भी निलंबित या रद्द किए जा सकते हैं। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग पुलिस के साथ मिलकर मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन रिपोर्ट, बिल और स्टाफ रिकॉर्ड की जांच कर साक्ष्य जुटा रहा है।





















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