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एयर एंबुलेंस हादसा: सात जिंदगियां बुझीं, कई परिवारों के सपने बिखरे

On: February 25, 2026 11:05 PM
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चतरा। एयर एंबुलेंस हादसे ने सिर्फ सात जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि सात परिवारों के सपनों, उम्मीदों और सहारों को भी हमेशा के लिए तोड़ दिया। जान बचाने के लिए उड़ान भरने वाला विमान खुद काल का ग्रास बन गया और पीछे छोड़ गया असहनीय दर्द। सबसे अधिक सदमा डॉ. विकास कुमार गुप्ता के परिवार को लगा है। उनके पिता बजरंगी प्रसाद की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। कांपती आवाज में उन्होंने मंत्री इरफान अंसारी, चतरा सांसद काली चरण सिंह और विधायक जनार्दन पासवान को बताया कि उन्होंने अपने बेटे को सब्जी बेच-बेचकर पढ़ाया था। गरीबी और अभाव के बावजूद डॉक्टर बनाने का सपना देखा और उसे पूरा भी किया। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा, संघर्षों का प्रतिफल देगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के कंधे पर सिर रखकर सुकून पाने का सपना था, आज उसी बेटे की अर्थी पिता को अपने कंधों पर उठानी पड़ी। यह दृश्य देख हर आंख नम हो गई। वहीं इस हादसे ने चतरा के कार्यपालक अभियंता देवसहाय भगत के परिवार को भी झकझोर कर रख दिया। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे में मुझे रब दिखता था। विकास में समाज सेवा का जज्बा था।” हादसे में जान गंवाने वाले पायलट विवेक विकास भगत उनके इकलौते पुत्र थे। परिवार की सारी उम्मीदें और भविष्य उसी एक बेटे से जुड़ा था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। मां बेसुध हो गईं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जाता है कि अपार दुख के बीच भी कार्यपालक अभियंता ने धैर्य का परिचय दिया। वे हरियाणा के सह-पायलट के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर चिंतित दिखे। इतना बड़ा व्यक्तिगत आघात सहने के बाद भी उनके भीतर सेवा भावना का जज्बा लोगों को भावुक कर गया। दोनों परिवारों में मातम का ऐसा माहौल है, जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। घर की महिलाएं दहाड़ मारकर रो रही हैं, परिजनों की चीख-पुकार से वातावरण गमगीन है। हर किसी के मन में बस एक ही सवाल हैकृआखिर ऐसा क्यों हुआ? सांसद, विधायक, मंत्री, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने भी परिवारों से मिलकर ढांढस बंधाया और उनके धैर्य की सराहना की। यह हादसा एक बार फिर याद दिला गया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। जिन बेटों को पिता ने अपने बुढ़ापे का सहारा समझकर पाला-पोसा, आज उन्हीं की अर्थी को कंधा देना पड़ा। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के जीवन में कभी न भरने वाला जख्म बन गया है। आज पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है और हर आंख नम है।

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