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‘नाड़ा खींचना भी बलात्कार का प्रयास’: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द

On: February 18, 2026 11:50 PM
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यौन अपराधों से जुड़े एक अहम मामले में उच्चतम न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी नाबालिग के निजी अंग पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा खींचना महज ‘तैयारी’ नहीं, बल्कि बलात्कार का प्रयास माना जाएगा। अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विवादास्पद आदेश को रद्द करते हुए आपराधिक न्यायशास्त्र के सिद्धांतों की दोबारा पुष्टि की है।

Supreme Court of India की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय का निष्कर्ष आपराधिक कानून के स्थापित सिद्धांतों का स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग था। पीठ में सूर्यकांत (प्रधान न्यायाधीश), जॉयमाल्य बागची और एनवी अंजारिया शामिल थे। शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को स्वत: संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किया और कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत अपराध करने के इरादे को दर्शाता है।

Allahabad High Court ने 17 मार्च 2025 के आदेश में कहा था कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘बलात्कार का प्रयास’ नहीं बल्कि केवल ‘तैयारी’ है। यह आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों की हरकतें स्पष्ट रूप से बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आती हैं और इस मामले में पॉक्सो के तहत लगाए गए मूल आरोप बहाल किए जाते हैं।

मामले में Protection of Children from Sexual Offences Act (पॉक्सो) और भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) से संबंधित प्रावधान लागू किए गए हैं। शीर्ष अदालत ने 23 जून 2023 को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो), कासगंज द्वारा पारित मूल समन आदेश को बहाल कर दिया।

याचिका के अनुसार, 10 नवंबर 2021 को एक महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के तीन युवक मिले और लड़की को मोटरसाइकिल से छोड़ने की पेशकश की। आरोप है कि रास्ते में मोटरसाइकिल रोककर लड़की के निजी अंग पकड़े गए और उसे पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की गई। लड़की की चीख सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी फरार हो गए।

अदालत की स्पष्ट टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके इस फैसले को केवल प्रथम दृष्टया मूल्यांकन के रूप में देखा जाए और इसे अंतिम दोषसिद्धि के रूप में न माना जाए। यह फैसला यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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