
चतरा/गिद्धौर। जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया गया। चतरा शहर के कठौतिया मंदिर, हेरुआ नदी स्थित शिवालय एवं बड़ा शिव मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दिनभर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का सिलसिला चलता रहा। गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। खासकर महिलाओं और कुमारी कन्याओं में पूजा को लेकर गहरी आस्था नजर आई। प्रखंड के चर्चित बटेश्वर शिव मंदिर, रामेश्वर शिव मंदिर, सलगा शिव मंदिर, कटघरा शिव मंदिर, बारिसाखी शिव मंदिर, पेक्सा शिव मंदिर, पिंडारकोण शिव मंदिर, बलबल शिव मंदिर एवं मां कालेश्वर मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा की, जबकि कुमारी कन्याओं ने योग्य वर की प्राप्ति की मन्नत के साथ भोलेनाथ का पूजन किया। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तक शिव आराधना का विशेष महत्व बताया जाता है। पूजा में भांग, धतूरा, बेलपत्र, दूध और जल सहित औषधीय सामग्री अर्पित की गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से की गई पूजा से जाने-अनजाने में हुई भूलों का क्षय होता है तथा मोक्ष फल की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर शिवलिंग का जलाभिषेक, रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। इस वर्ष 15 फरवरी को पड़े महाशिवरात्रि को विशेष संयोग वाला बताया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन 12 शुभयोग एवं चार राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो साधना और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी है। पूजा में शामिल प्रतिमा देवी, गायत्री देवी, नीतू देवी, प्रतिमा कुमारी सहित दर्जनों महिलाओं ने बताया कि प्रत्येक सुहागिन स्त्री को महाशिवरात्रि का व्रत अवश्य करना चाहिए। उनका कहना था कि भगवान भोलेनाथ की आराधना से काम, क्रोध, मोह और लोभ जैसे नकारात्मक भावों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा और देर रात तक भक्ति का वातावरण बना रहा।























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