
इस वर्ष की महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग, साधना और संकल्प का महापर्व : रामाधार पाठक
लोहरदगा —ज्योतिषाचार्य रामाधार पाठक ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कहा है कि इस वर्ष का यह महापर्व आध्यात्मिक, ज्योतिषीय एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है, जो वर्षों बाद प्राप्त होता है। यह संयोग साधना, मंत्र-जप, ध्यान और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत सिद्धिदायक माना गया है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर का पूजन विशेष फलदायी होता है। प्रत्येक प्रहर में जल, दुग्ध, दही, घृत, शहद एवं गंगाजल से अभिषेक कर “ॐ नमः शिवाय” तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस वर्ष निशीथ काल का शुभ मुहूर्त अत्यंत प्रभावशाली है, जिससे रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा पाठ का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार चंद्रमा की अनुकूल स्थिति मानसिक शांति और निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करेगी। जिन जातकों की कुंडली में चंद्र, शनि या राहु से संबंधित दोष हैं, उनके लिए शिव आराधना विशेष लाभकारी सिद्ध होगी। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा एवं अक्षत अर्पित करने से ग्रहजनित बाधाएँ शांत होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
ज्योतिषाचार्य रामाधार पाठक ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। शिव-पार्वती विवाह उत्सव का स्मरण दांपत्य जीवन में संतुलन, परिवार में एकता और समाज में समरसता का संदेश देता है। आज के समय में जब भौतिकता बढ़ रही है, ऐसे में शिव का सादा, संयमी और कल्याणकारी स्वरूप हमें मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर पर नशामुक्ति, सदाचार, पर्यावरण संरक्षण तथा समाज सेवा का संकल्प लें। मंदिरों में सामूहिक रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि महादेव की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का वास हो तथा समाज में धर्म, नैतिकता और सद्भाव की भावना सुदृढ़ हो — यही मंगलकामना है।
















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