
रांची। हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति की राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट को लेकर चल रहे विवाद में हाई कोर्ट की खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे जांच के लिए हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज से संपर्क कर इसकी सूचना कोर्ट को दें। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की गई है।
दरअसल, एकलपीठ ने एक सितंबर 2025 को जेएसएससी को मेरिट लिस्ट की जांच के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, जस्टिस पाठक ने आयोग में शामिल होने से असमर्थता जताते हुए इनकार कर दिया। इसके बाद यह मामला खंडपीठ में पहुंचा, जहां सरकार और जेएसएससी ने एकलपीठ के आदेश को नियमसम्मत नहीं बताते हुए निरस्त करने की मांग की है।
मीना कुमारी एवं अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि वर्ष 2016 की हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति की राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट में त्रुटियां हैं। आरोप है कि अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई, जबकि कम अंक पाने वालों को चयनित कर लिया गया। जेएसएससी ने अपनी अपील में करीब 50 बिंदु अदालत के समक्ष रखे हैं। आयोग का कहना है कि याचिकाकर्ताओं का यह दावा गलत है कि कम अंक वाले को चयनित और अधिक अंक वाले को वंचित किया गया।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्ष किसी अन्य सेवानिवृत्त जज से संपर्क कर जांच आयोग के गठन पर सहमति बनाएं और कोर्ट को अवगत कराएं। अब 27 फरवरी की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मामला न केवल हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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