Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेलकूद क्राइम शिक्षा राजनीति स्वास्थ राशिफल
---Advertisement---

60 साल पुरानी वसीयत के आधार पर जमीन पाने की याचिका खारिज

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

60 साल पुरानी वसीयत के आधार पर जमीन पाने की याचिका खारिज

 

गुमला जिला न्यायालय ने सुनाया फैसला, 14 एकड़ से अधिक जमीन से जुड़ा है विवाद; वसीयत में कई संदिग्ध परिस्थितियां मिलने पर प्रशासन पत्र देने से इनकार

 

गुमला। जिला न्यायालय-तृतीय, गुमला ने करीब 14 एकड़ जमीन से जुड़े वसीयत विवाद में दो याचिकाकर्ताओं की अर्जी खारिज कर दी है। जिला जज भूपेश कुमार की अदालत ने आठ अक्टूबर 2026 को सुनाए फैसले में कहा कि वसीयत के आधार पर संपत्ति का प्रशासन पत्र (लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) देने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने वसीयत के आसपास गंभीर संदेहास्पद परिस्थितियां पाए जाने और आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं करने सहित अन्य आधारों पर याचिका खारिज की।

 

मामला गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के हापामुनी गांव में खाता संख्या 102 और 103 की जमीन से संबंधित है। जमीन का कुल रकबा लगभग 14.08 एकड़ बताया गया है। सुरेश मणि पाठक और रमेश मणि पाठक ने दावा किया था कि उनके पिता जगत मणि पाठक के पक्ष में शिव मणि पाठक ने 23 नवंबर 1960 को पंजीकृत वसीयत की थी। इसी वसीयत के आधार पर उन्होंने संपत्ति का प्रशासन पत्र जारी करने की मांग की थी।

 

वहीं, शिव मणि पाठक की पुत्री सुनैना देवी ने वसीयत को फर्जी बताते हुए इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि पिता की मृत्यु के बाद जमीन पर उनका अधिकार है और संबंधित वसीयत पर उनके पिता के हस्ताक्षर भी वास्तविक नहीं हैं।

 

वसीयत और हलफनामे पर उठे सवाल

 

अदालत ने अपने फैसले में वसीयत के निष्पादन और उसकी वैधता से जुड़े साक्ष्यों का परीक्षण किया। साथ ही 27 मार्च 1991 के कथित हलफनामे को भी प्रमाणित नहीं माना। अदालत के अनुसार, संबंधित कार्यालय में हलफनामे का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था और सुनैना देवी के हस्ताक्षर तथा हलफनामे के विधिवत निष्पादन को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए।

 

अदालत ने यह भी पाया कि जगत मणि पाठक की दो पुत्रियों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था। इसके अलावा, जमीन का मूल्यांकन और न्यायालय शुल्क भुगतान भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था। अदालत ने जमीन का मूल्य तत्कालीन कलेक्टर दर के आधार पर 43,53,673.50 रुपये आंका और कहा कि इसी मूल्य के अनुसार न्यायालय शुल्क देय था।

 

इन निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी। फैसले में किसी पक्ष पर मुकदमे का खर्च देने का आदेश नहीं दिया गया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

सेवानिवृत्त चौकीदार सकुर अंसारी के निधन से शोक की लहर

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल पिंजु उरांव को रिम्स किया गया रेफर, जय श्रीराम समिति ने की बेहतर इलाज की पहल

शारदीय नवरात्र की कलश यात्रा में गूंजेगा महाराष्ट्र का प्रसिद्ध ‘पुनेरी ढोल’, दुर्गोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी तेज

10 अक्टूबर को सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक विद्युत आपूर्ति रहेगी बाधित, जरूरी काम समय से निपटाने की अपील

11 अक्टूबर, सुबह 7 बजे रविवार को देवी मंदिर पावरगंज से कलश यात्रा के साथ शारदीय नवरात्र का होगा शुभारंभ, सभी सनातन बढ़ चढ़कर इस कलश यात्रा में हों शामिल: विश्व हिंदू परिषद*

14 अक्टूबर के शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने में जुटी जय श्रीराम महिला समिति

Leave a Comment