अखिलेश्वर धाम में ऐतिहासिक जतरा मेला सम्पन्न, 20 से अधिक खोड़हा दलों ने पारंपरिक नृत्य से बांधा समां
ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे सैकड़ों कलाकार, आदिवासी संस्कृति और परंपरा की दिखी अनुपम झलक
भंडरा (लोहरदगा)। प्रखंड के प्रसिद्ध आस्था केंद्र अखिलेश्वर धाम में शुक्रवार को ऐतिहासिक अखिलेश्वर जतरा मेला पारंपरिक रीति-रिवाज, उत्साह और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस दौरान पूरा धाम क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और लोक परंपराओं के रंग में सराबोर नजर आया। मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, वहीं पारंपरिक खोड़हा नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत कसपुर गांव के पाहन-पुजार द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। मंत्रोच्चारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच जतरा की शुरुआत की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अखिलेश्वर धाम में मत्था टेककर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
20 से अधिक खोड़हा दलों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा
जतरा मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक खोड़हा नृत्य रहा। कसपुर, अम्बेरा, हाटी, भंडरा, नवाटोली और बिछिया टोली समेत दर्जनभर गांवों के 20 से अधिक खोड़हा दलों ने भाग लिया। पारंपरिक धोती-कुर्ता, पगड़ी और रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने ढोल, नगाड़ा और मांदर की गूंजती थाप पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। एक साथ सैकड़ों कलाकारों की थिरकती कदमताल ने मेले में समां बांध दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। युवाओं के साथ बुजुर्गों की भागीदारी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।
ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
जतरा मेले के सफल आयोजन में कसपुर, बिछिया टोली और नवाटोली गांव के युवाओं, ग्रामीणों तथा आयोजन समिति के सदस्यों की अहम भूमिका रही। ग्रामीणों ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में भी सक्रिय सहयोग दिया। अंत में आयोजन समिति ने सभी खोड़हा दलों, पाहन-पुजार और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
अखिलेश्वर जतरा मेला एक बार फिर क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोककला और पारंपरिक विरासत को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना।


















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