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गांव में मिली सूर्य भगवान की प्राचीन प्रतिमा, इलाके में हलचल

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पुरातत्व विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने किया स्थल का बारीकी से सर्वे, प्राचीन अवशेषों की जुटाई जानकारी; अब रिपोर्ट पर टिकी लोगों की निगाहें

मयूरहंड (चतरा)। कहते हैं, धरती अपने गर्भ में सदियों के राज छिपाए रखती है और कभी-कभी वे अचानक सामने आ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है चतरा जिले के मयूरहंड प्रखंड अंतर्गत फुलांग गांव में, जहां सूर्य भगवान की प्राचीन प्रतिमा मिलने से पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। प्रतिमा मिलने की सूचना फैलते ही लोगों में कौतूहल का माहौल है, वहीं सूचना के बाद पुरातत्व विभाग की तीन सदस्यीय टीम भी गांव पहुंची और मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की।

फुलांग गांव में प्राचीन प्रतिमा मिलने की खबर जैसे ही आसपास के इलाकों में पहुंची, बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए उत्सुक नजर आए। सूचना मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की तीन सदस्यीय टीम फुलांग पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले प्रतिमा का बारीकी से निरीक्षण किया और इसके बाद आसपास के पूरे क्षेत्र का भी जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान टीम ने स्थल पर मौजूद प्राचीन अवशेषों की भी जानकारी जुटाई। टीम ने पूरे स्थल का सर्वे कर प्रतिमा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को देखा और परखा। माना जा रहा है कि प्रतिमा की बनावट, उसकी स्थिति और आसपास मिले अवशेषों के आधार पर उसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

प्राचीन प्रतिमा मिलने के बाद ग्रामीणों में इतिहास और पुरातात्विक महत्व को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। गांव में इस विषय पर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग यह जानना चाहते हैं कि यह प्रतिमा किस काल की है और इसका इतिहास क्या है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी प्राचीन अवशेष मिलने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह प्रतिमा उन दावों को और बल देती नजर आ रही है। यही कारण है कि पुरातत्व विभाग के इस सर्वे को क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस सर्वे से इलाके के छिपे हुए ऐतिहासिक पहलू सामने आ सकेंगे।

अब सभी की नजर पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। सर्वे के बाद प्रतिमा की प्राचीनता, उसके ऐतिहासिक महत्व और स्थल से जुड़े अन्य तथ्यों पर विभाग की ओर से क्या निष्कर्ष सामने आता है, यह देखना बेहद अहम होगा। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि फुलांग की यह धरोहर इतिहास के किस अध्याय से जुड़ी है और क्षेत्र के पुरातात्विक मानचित्र पर इसकी क्या जगह बनेगी।

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