सरकार के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन, पीएम मोदी ने पेपर लीक पर सख्त कानून का दिया संकेत
नई दिल्ली: करीब 25 दिनों से जारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन गुरुवार देर रात समाप्त हो गया। दिल्ली के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान जेपी नड्डा ने अपने हाथों से जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। मौके पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो और डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रही।
सोनम वांगचुक ने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की विभिन्न मांगों के समर्थन में अनशन शुरू किया था। लंबे उपवास के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उनका वजन भी कम हो गया। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच 19 जुलाई को अदालत के निर्देश और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।
वांगचुक की प्रमुख मांग थी कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक वार्ता करे और आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करे। बताया गया कि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत में सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार और अधिक सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में तैयार मसौदे पर चर्चा होगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे संसद के आगामी सत्र में विधेयक के रूप में पेश करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, दोषियों के लिए कठोर सजा तथा परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की तैयारी है।























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