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सत्ता बदलते ही बड़ा उलटफेर: सालों से बंद मंदिरों के खुले ताले, अवैध वसूली रुकी; लेकिन हिंसा और आगजनी से भी दहला राज्य!

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9 मई को होगा नई BJP सरकार का शपथ ग्रहण; शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या और लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई, तो दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों ने मनाया जश्न

कोलकाता, News Scale Live: पश्चिम बंगाल में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के साथ ही राज्य की पूरी फिजा बदलती हुई नजर आ रही है। पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही बीजेपी (BJP) के सत्ता में आते ही बंगाल में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां सालों से दबी भावनाएं सकारात्मक बदलाव के रूप में सामने आ रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ ने पूरे राज्य को दहला कर रख दिया है। हिंसा और खौफ का माहौल: शुभेंदु के PA की हत्या सत्ता पलटते ही पूरे राज्य से हिंसक झड़पों की खौफनाक खबरें आ रही हैं। 9 मई को होने वाले नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले, बंगाल बीजेपी के कद्दावर नेता और संभावित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए (PA) की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई है। इसके अलावा मुर्शिदाबाद के जियागंज में उग्र भीड़ ने लेनिन की मूर्ति को तोड़ दिया, जबकि 24 परगना में टीएमसी (TMC) नेता जहांगीर खान के ऑफिस में भीड़ ने घुसकर जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की।

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कांग्रेस ने वापस लिए अपने दफ्तर, मंदिरों के खुले ताले इन हिंसक घटनाओं के बीच कुछ बेहद सकारात्मक तस्वीरें भी बंगाल से सामने आई हैं। चुनाव के नतीजे आते ही जहां बीजेपी दफ्तरों में मिठाइयां बंट रही थीं, वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी टीएमसी के कब्जे से अपने कार्यालयों को मुक्त करा लिया। कई जिलों में कांग्रेसियों ने सालों से लगे ताले तोड़कर अपने दफ्तर वापस ले लिए। इतना ही नहीं, कई जिलों में जिन मंदिरों पर सालों से ताले लटके हुए थे, सत्ता बदलते ही उन तालों को खोल दिया गया है और वहां साफ-सफाई व पूजा-पाठ शुरू हो गई है।

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बॉर्डर पर अवैध वसूली बंद, सरकारी कर्मचारियों ने मनाया जश्न बंगाल से सटी अन्य राज्यों की सीमाओं पर पुलिस और टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा वाहनों से की जाने वाली अवैध वसूली (Extortion) रातों-रात बंद हो गई है। जिन नाकों पर पहले ट्रकों से वसूली होती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है और वाहन बेरोकटोक गुजर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर बंगाल सचिवालय से आई, जहां सरकारी कर्मचारियों ने चुनावी नतीजे साफ होते ही खुलेआम जश्न मनाया। ये कर्मचारी सालों से अपनी रुकी हुई डीए (DA) बढ़ाने की मांग को लेकर पिछली सरकार से नाराज चल रहे थे। फिलहाल पूरे राज्य को 9 मई का बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि शपथ ग्रहण के बाद नई सरकार के सत्ता संभालते ही राज्य की चरमराई कानून-व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी।

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