वायरल तस्वीर ने झकझोरा शासन, CM के निर्देश पर हरकत में प्रशासन
रांची/लोहरदगा (झारखंड)। लोहरदगा जिले से सामने आई एक मार्मिक तस्वीर ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। सड़क किनारे एक असहाय महिला बेसुध पड़ी थी, जबकि उसके तीन मासूम बच्चे भूख से बिलखते हुए कूड़े के ढेर में खाना तलाशते नजर आए। यह दृश्य न सिर्फ गरीबी की भयावह सच्चाई दिखाता है, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। बताया जा रहा है कि महिला के पति की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी। लगातार आर्थिक तंगी, सहारे की कमी और बढ़ती परेशानियों ने इस परिवार को सड़क पर जीवन जीने को मजबूर कर दिया। कई दिनों से भूखे रहने के कारण महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि वह सड़क किनारे ही बेहोश होकर गिर पड़ी, जबकि उसके बच्चे आसपास फेंके गए कचरे में भोजन तलाशते रहे।
गौरतलब है कि संकटग्रस्त बच्चों के लिए ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत बाल संरक्षण इकाइयों के माध्यम से कई योजनाएं संचालित हैं, जिनमें किशोर न्याय निधि और स्पॉन्सरशिप योजना प्रमुख हैं। इन योजनाओं के तहत ऐसे बच्चों को आर्थिक सहायता और संरक्षण देने का प्रावधान है। बावजूद इसके, इस परिवार की स्थिति ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस हृदयविदारक तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में पहुंचा। तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए लोहरदगा के उपायुक्त को सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि परिवार को तुरंत सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाए, बच्चों की शिक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और उन्हें सभी सरकारी योजनाओं से जोड़कर स्थायी सहायता प्रदान की जाए। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर टाटा ट्रस्ट्स जैसे सामाजिक एवं चैरिटेबल संस्थानों के सहयोग से परिवार के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन क्या उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच पा रहा है? अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
इसे भी पढ़ेः- बेड़ियों में जकड़ी मासूम 15 दिन तक भटकती रही, अब जाकर पहुंची संरक्षण में





















Total Users : 917922
Total views : 2662456