तूतीकोरिन की घटना को कोर्ट ने बताया ‘रेयररेस्ट ऑफ रेयर’, 6 साल बाद मिला न्याय
तूतीकोरिन (तमिलनाडु) के बहुचर्चित सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग मामला में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी पाए गए सभी 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘रेयररेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में रखते हुए कहा कि यह क्रूरता और सत्ता के दुरुपयोग का चरम उदाहरण है। करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन की अदालत ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए हिरासत में अमानवीय अत्याचार किया, जो कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ है।
यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था, जब व्यापारी पी. जयराम और उनके बेटे जे. बेन्निक्स को कोविड-19 लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि उन्होंने निर्धारित समय के बाद दुकान खुली रखी थी। जांच में सामने आया कि हिरासत के दौरान पिता-पुत्र के साथ लगातार और बर्बर मारपीट की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और अंततः उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा और अत्यधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया।
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घटना के बाद पूरे तमिलनाडु समेत देशभर में आक्रोश फैल गया था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी गई थी। सीबीआई जांच में यह साबित हुआ कि यह सुनियोजित अत्याचार था, जिसमें पूरी रात पिता-पुत्र को प्रताड़ित किया गया। एजेंसी ने अदालत से दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी।
अदालत ने इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन समेत कुल 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह सामान्य अपराध नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।फैसले के बाद इसे न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो।






















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