ग्रामीण आय और नए मॉडल लॉन्च से मांग को मिलेगा सहारा
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश का ऑटो खुदरा क्षेत्र चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर सकता है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन की ताजा रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में शादी का सीजन, रबी फसल के बाद बढ़ी ग्रामीण आय और जीएसटी 2.0 के चलते बढ़ी वहनीयता इस अवधि में मांग को मजबूती देगी। सर्वे में शामिल 49.81 प्रतिशत डीलरों ने बिक्री में वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 40.52 प्रतिशत ने स्थिर प्रदर्शन और 9.67 प्रतिशत ने गिरावट की आशंका व्यक्त की है। इससे संकेत मिलता है कि चुनौतियों के बावजूद बाजार की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डीलरों का भरोसा और अधिक मजबूत नजर आ रहा है। करीब 74.72 प्रतिशत डीलरों ने वृद्धि की उम्मीद जताई है, जिनमें अधिकांश 3 से 7 प्रतिशत तक की बढ़त का अनुमान लगा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डीलर समुदाय मौजूदा अनिश्चितताओं को अस्थायी मान रहा है और मध्यम अवधि में मांग को स्थिर देख रहा है।
पहली तिमाही में मांग को सहारा देने वाले प्रमुख कारकों में शादी का सीजन, यात्री वाहनों और दोपहिया श्रेणी में नए मॉडल लॉन्च और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर नकदी प्रवाह शामिल हैं। वहीं भारतीय मौसम विभाग द्वारा सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम तापमान का पूर्वानुमान भी कृषि और परिवहन मांग के लिए अनुकूल माना जा रहा है। हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। सर्वे में 40.5 प्रतिशत डीलरों ने आर्थिक सुस्ती और उपभोक्ता भावना में गिरावट को सबसे बड़ा खतरा बताया, जबकि 30.5 प्रतिशत ने पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधा और वाहनों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 56.9 प्रतिशत डीलरों के अनुसार इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की ओर बढ़ती रुचि ऑटो सेक्टर में बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। कुल मिलाकर, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ऑटो क्षेत्र “मध्यम लेकिन स्वस्थ वृद्धि” दर्ज करेगा और यह क्षेत्र पिछले वर्ष की तेज रफ्तार के बाद संतुलित स्थिति की ओर बढ़ेगा।






















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