45 दिन में मिल रहा सिलेंडर, होटल बंद-मिड डे मील पर भी असर
प्रतापपुर (चतरा)। जिले के प्रतापपुर प्रखंड क्षेत्र में रसोई गैस की अनियमित आपूर्ति अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और शैक्षणिक व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, गैस वितरण में लागू ओटीपी प्रणाली के कारण भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर ओटीपी का उपयोग नहीं होने पर सिलेंडर बुकिंग रद्द हो जाती है, जिससे लोगों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं, एक सिलेंडर के लिए करीब 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण लोग मजबूरी में लकड़ी, कोयला और इंडक्शन चूल्हे का सहारा ले रहे हैं, लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण यह विकल्प भी कारगर साबित नहीं हो पा रहा। इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यवसायों पर पड़ा है। रामपुर क्षेत्र के ललन होटल और रामप्रवेश होटल जैसे कई छोटे होटल गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण बंद हो गए थे। हालांकि बाद में कोयले के सहारे इन्हें दोबारा चालू किया गया, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है। वहीं, गैस संकट का असर विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना पर भी पड़ रहा है। बच्चों के लिए भोजन बनाना अनिवार्य है, लेकिन गैस की कमी के कारण स्कूलों में लकड़ी जलाकर खाना बनाने की मजबूरी हो गई है, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन ने प्रशासन से मांग की है कि गैस आपूर्ति को नियमित और सुचारू बनाया जाए। विशेष रूप से विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की अपील की गई है, ताकि बच्चों के भोजन में किसी तरह की बाधा न आए। यह स्थिति न केवल व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण जीवन की मूलभूत जरूरतों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।






















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