बिहार की सियासत में हलचल तेज
नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा मंत्री विजय कुमार चौधरी और जद(यू) एमएलसी संजय कुमार द्वारा परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया।
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने पुष्टि करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का इस्तीफा प्राप्त हो चुका है और उसे स्वीकार भी कर लिया गया है। साथ ही, उनकी सीट को जल्द ही आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित किया जाएगा। दरअसल, जद(यू) प्रमुख 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, उन्हें 14 दिनों के भीतर किसी एक पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था, जिसकी समयसीमा सोमवार को समाप्त हो रही थी। जद(यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि प्रक्रिया संविधान के अनुरूप पूरी की जाएगी।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल अब भी बना हुआ है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर नीतीश कुमार आगे क्या फैसला लेते हैं। इस पर पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। इधर, नितिन नवीन भी राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अपनी बिहार विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन का इस्तीफा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को सौंपा जाएगा।
नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से क्षेत्र की सेवा करते रहे हैं और जनता ने उन्हें लगातार पांच बार चुनकर सेवा का अवसर दिया। उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के योगदान को भी याद किया। इस घटनाक्रम के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक फैसलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।






















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