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नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार, 10 हजार से अधिक माओवादियों का सरेंडर, 31 मार्च तक उन्मूलन का लक्ष्य

On: March 30, 2026 12:18 AM
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देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में बीते एक दशक में बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की पुनर्वास योजनाओं के प्रभाव से 10,000 से अधिक माओवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए 31 मार्च तक की समयसीमा तय कर रखी है, जिसको लेकर अभियान तेज कर दिया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 2,300 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 630 से अधिक नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं। यह बदलाव सरकार की सख्त रणनीति और पुनर्वास नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलवाद से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एकीकृत और बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिसने पहले की बिखरी हुई नीतियों की जगह ली है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ‘रेड कॉरिडोर’ में तेजी से हुए बुनियादी ढांचे का विकास है। कभी बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में फैले इस क्षेत्र में अब व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

सरकार ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण का जिम्मा दिया। इसके तहत 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया, जिनमें से 12,250 किलोमीटर सड़कें पिछले 10 वर्षों में बनी हैं। साथ ही पांच प्रमुख सड़कों और छह महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण भी किया गया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2014 में जहां इन इलाकों में मात्र 66 पुलिस थाने थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 586 हो गई है। इसके अलावा, पिछले एक वर्ष में 361 नए सुरक्षा शिविर और 68 अत्याधुनिक हेलीपैड बनाए गए हैं, जहां रात में भी हेलीकॉप्टर उतर सकते हैं।

इन प्रयासों का असर साफ दिख रहा है। वर्ष 2013 में जहां 76 जिलों के 330 थाना क्षेत्रों में नक्सली घटनाएं दर्ज होती थीं, वहीं जून 2025 तक यह घटकर केवल 22 जिलों के 52 थाना क्षेत्रों तक सीमित रह गई हैं। सरकार ने सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना, आधार पंजीकरण और आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों की संख्या 92,847 से बढ़कर 2,54,045 हो गई। वहीं आयुष्मान कार्ड और आधार पंजीकरण में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने निवेश बढ़ाया है। पिछले 10 वर्षों में 250 से अधिक एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 179 चालू हो चुके हैं। इसके अलावा 11 केंद्रीय विद्यालय और 6 नवोदय विद्यालय भी खोले गए हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा, विकास और पुनर्वास की त्रिस्तरीय रणनीति ने नक्सलवाद की जड़ों को कमजोर कर दिया है। अब अंतिम चरण में अभियान को और तेज कर देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।

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