
प्यार था… साथ था… लेकिन समाज की मुहर नहीं। कई जोड़े लिव-इन में रहने को मजबूर थे। मगर अब तस्वीर बदल गई — ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच 101 जोड़े एक साथ सात फेरे लेकर वैवाहिक बंधन में बंध गए। यह सिर्फ शादी नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकृति और सम्मान की नई शुरुआत बनी।
गुमला। जिले के आदर्श ग्राम तेलगांव में नवयुवक संघ तेलगांव की ओर से प्रेम एवं लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे 101 जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन के साथ सामाजिक रूप से ‘ढुकू’ प्रथा से जुड़े कलंक को मिटाने की पहल भी की गई।
तेलगांव पंचायत स्थित सामुदायिक भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम पूर्व थानेदार सह समाजसेवी जगन्नाथ उरांव के संरक्षण एवं नेतृत्व में संपन्न हुआ। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीत-संगीत के बीच विभिन्न धर्मों और समुदायों की रीति-रिवाजों के अनुसार सभी जोड़ों का विवाह कराया गया।
कई राज्यों से पहुंचे जोड़े
इस सामूहिक विवाह में ओडिशा से 3, छत्तीसगढ़ से 7, लोहरदगा जिले से 9 तथा गुमला जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 101 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। इनमें सद्दान समाज के 20 जोड़े भी शामिल थे। आयोजन ने सामाजिक एकता और भाईचारे का सशक्त संदेश दिया।
दानदाताओं का सहयोग
कार्यक्रम में चेन्नई से पहुंचे नायडू दंपति ने 101 साड़ियां भेंट कीं, जबकि कृष्णा कुमार प्रिटोरिया ने वरों के लिए कुर्ता-पायजामा प्रदान किया। झारखंड के विभिन्न जिलों से समाजसेवियों एवं दानदाताओं ने सहयोग दिया, जिनमें संतोष चचरा (जमशेदपुर), जलेश्वर उरांव (सिसई), हितेश्वर उरांव (बेहरा टोली), निर्मल गोयल, अजय मंत्री, विजय गुप्ता और कौशलेंद्र प्रमुख रहे। आदिवासी जोड़ों का कन्यादान जगन्नाथ उरांव एवं उनकी पत्नी ने किया, जबकि सद्दान समाज के जोड़ों का कन्यादान किशोर कुमार एवं उनकी पत्नी द्वारा संपन्न कराया गया। विवाह उपरांत सभी परिवारों और अतिथियों के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पहल
नवयुवक संघ के संरक्षक जगन्नाथ उरांव ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण कई युवक-युवतियां पारंपरिक विवाह नहीं कर पाते और लिव-इन में रहने को मजबूर हो जाते हैं, जिन्हें समाज सही दृष्टि से नहीं देखता। ऐसे जरूरतमंद जोड़ों का विवाह कराना संघ का उद्देश्य है, ताकि वे सम्मानपूर्वक सामाजिक जीवन जी सकें। सद्दान समाज के जोड़ों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से तथा सरना धर्म के जोड़ों का विवाह पहान बैगा द्वारा पारंपरिक विधि से संपन्न कराया गया। इस सफल आयोजन में कृष्ण उरांव, प्रदीप चौधरी, विनोद उरांव (मुखिया), देवी उरांव, महेश चौधरी, नरेंद्र साहू, सिलेधर सिंह, राज चौधरी, आशा टोप्पो, ओम प्रकाश बड़ाइक सहित दर्जनों महिला-पुरुष कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
यह सामूहिक विवाह समारोह न केवल सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने की दिशा में एक मजबूत पहल साबित हुआ, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रेरणादायक उदाहरण भी बना।






















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