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99.61 प्रतिशत अंक लाकर अनुभव सुमन ने बढ़ाया पत्थलगड़ा प्रखंड का मान

On: February 18, 2026 1:04 AM
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पत्थलगड़ा (चतरा)। पत्थलगड़ा प्रखंड क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण तब आया जब पत्थलगड़ा निवासी संजय सुमन के पुत्र अनुभव सुमन ने जेईई मेन्स परीक्षा में 99.61 प्रतिशत अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पत्थलगड़ा प्रखंड, जिला चतरा और पूरे झारखंड का नाम रोशन किया। इस शानदार उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। अनुभव की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 1 से 5 तक उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पत्थलगड़ा में हुई। इसके बाद कक्षा 6 से 10 तक उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, चतरा में अध्ययन किया। वर्तमान में वे जवाहर नवोदय विद्यालय, रांची के छात्र हैं, जहां वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। यह सफलता केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों के संस्कार, अनुशासन और सतत परिश्रम का प्रतिफल है। उनके स्वर्गीय दादा त्रिभुवन नाथ दांगी, जो पेशे से शिक्षक थे, भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्शों और शिक्षाओं ने अनुभव की इस उपलब्धि की मजबूत नींव रखी। अनुभव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया, जो 108 एंबुलेंस सेवा में कार्यरत हैं और दिन-रात जनसेवा में समर्पित रहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र को हर परिस्थिति में प्रेरित और प्रोत्साहित किया। उनकी माता मीना देवी, जो एक सक्रिय महिला समूह सदस्य हैं, ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ बेटे की पढ़ाई को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। कठिन समय में भी उनका धैर्य अडिग रहा। परिवार की छोटी बुआ कुमारी सुषमा, जो स्वयं शिक्षिका हैं, ने भी निरंतर मार्गदर्शन और प्रेरणा देकर अनुभव का आत्मविश्वास मजबूत किया। परिवार के सामूहिक सहयोग और सकारात्मक माहौल ने इस सफलता की राह को सशक्त बनाया। नवोदय विद्यालय के अनुशासित वातावरण और शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी। नियमित मॉक टेस्ट, समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान और छोटी-छोटी त्रुटियों को सुधारने की आदत उनकी तैयारी की प्रमुख विशेषताएं रहीं। देर रात तक अध्ययन और सुबह नई ऊर्जा के साथ अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। अनुभव का कहना है कि उनकी सफलता किसी विशेष कोचिंग पर निर्भर नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, दृढ़ निश्चय और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। 99.61 प्रतिशत की यह उपलब्धि एक छात्र की संघर्षमय, प्रेरणादायक और भावनात्मक यात्रा की मिसाल है। यह सफलता क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उन्हें बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

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