
कुंदा (चतरा)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना कुंदा प्रखंड क्षेत्र में दम तोड़ती नजर आ रही है। योजना के तहत लगाए गए कई जलमीनार खराब पड़े हैं, तो कई स्थानों पर कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। बावजूद इसके, जलमीनारों की मरम्मत को लेकर न तो संबंधित पदाधिकारियों की सक्रियता दिख रही है और न ही जनप्रतिनिधियों की पहल। मेदवाडीह के संजय यादव, रंजय कुमार समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दो वर्ष पूर्व जलमीनार लगाया गया था। शुरुआती दिनों में लोगों को पानी की समस्या से राहत भी मिली, लेकिन मोटर खराब होने के कारण पिछले दो माह से जलमीनार बंद पड़ा है। हथियापत्थर टोला के धीरेन्द्र भुइयां, गुड्डू भुइया और मनीष भुईया ने बताया कि दलित बस्ती के करीब 20 घरों के लिए सिर्फ एक चापाकल ही सहारा है। दो वर्ष पूर्व यहां जलमीनार का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन वह अधूरा ही रह गया। मांझीपारा गांव निवासी अजीत भारती ने कहा कि उनके घर के पास जलमीनार तो स्थापित किया गया, परंतु वह सिर्फ नाम मात्र का रह गया है। नवादा पंचायत के दारी गांव निवासी संतोष भारती के अनुसार, जलमीनार से महज एक सप्ताह पानी मिला, उसके बाद से वह बंद पड़ा है। कुंदा नगर टोला निवासी वार्ड सदस्य रवि शंकर वर्मा ने कहा कि जलमीनार अब केवल शोभा की वस्तु बनकर खड़ा है। वहीं भाजपा नेता लवकुश गुप्ता ने पेयजल संकट को लेकर नाराजगी जताते हुए विभाग से शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उपायुक्त से मांग की है कि गर्मी शुरू होने से पहले सभी खराब जलमीनारों की मरम्मत कराई जाए, ताकि प्रखंड क्षेत्र में संभावित पेयजल संकट से लोगों को राहत मिल सके।


















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