
गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। 13 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग के साथ दुष्कर्म के जघन्य मामले में विशेष न्यायाधीश संजीव भाटिया (पोक्सो कोर्ट) ने दोषी तांत्रिक संजय विश्वकर्मा को फांसी की सजा सुनाई है। मौत की सजा के साथ-साथ अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
इलाज के नाम पर दिया झांसा, फिर किया विश्वासघात
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषी संजय विश्वकर्मा मूल रूप से हजारीबाग के ईचाक का रहने वाला है। उसने पीड़िता के परिजनों को झांसा दिया था कि वह अपनी तांत्रिक विद्या और झाड़-फूंक से बच्ची की दिव्यांगता को पूरी तरह ठीक कर देगा।
भरोसे का फायदा: उसने परिजनों को विश्वास में लेकर इलाज के नाम पर बच्ची के साथ अलग कमरे में रहने की शर्त रखी।
महीनों तक शोषण: इसी बहाने उसने कई महीनों तक बच्ची के साथ हैवानियत की।
ठगी भी की: आरोपी ने इलाज के नाम पर गरीब परिवार से करीब 25 हजार रुपये भी ऐंठ लिए और बाद में बिना बताए फरार हो गया।
गर्भवती होने पर हुआ मामले का खुलासा
यह मामला अगस्त 2022 में तब उजागर हुआ जब परिजनों ने बच्ची की शारीरिक स्थिति में बदलाव देखा। चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Test) में नाबालिग के गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पीड़िता के पिता ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। विशेष अपर लोक अभियोजक सुधीर कुमार टोप्पो द्वारा पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि यह अपराध “क्रूरतम” श्रेणी में आता है।
“इस तरह के अपराध न केवल पीड़िता और उसके परिवार को गहरा आघात पहुंचाते हैं, बल्कि समाज की नैतिक चेतना को भी झकझोर देते हैं। भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कठोरतम दंड अनिवार्य है।” — अदालत का फैसला





















Total Users : 808434
Total views : 2510055