
गुमला। डीएवी पब्लिक स्कूल गुमला प्रबंध समिति के चेयरमैन नानकचंद गर्ग का 75 वर्ष की आयु में 11 फरवरी को आकस्मिक निधन हो गया। वे अंतिम सांस तक डीएवी परिवार के प्रति समर्पित भाव से कार्य करते रहे। उनके निधन से विद्यालय एवं डीएवी परिवार में शोक की लहर है।
निधन के उपरांत विद्यालय परिसर में एक भावपूर्ण शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित हवन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। शोकसभा में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. रमाकांत साहु ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डीएवी सीएमसी के प्रति नानकचंद जी का समर्पण और विद्यालय के विकास में उनका मार्गदर्शन सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने इसे डीएवी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
नानकचंद गर्ग डीएवी कॉलेज प्रबंधकारिणी समिति, नई दिल्ली के प्रतिष्ठित मानद कोषाध्यक्ष थे। उन्होंने देशभर के विभिन्न डीएवी पब्लिक स्कूलों के प्रशासन और प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई। डीएवी संस्थानों की वित्तीय संरचना को सुदृढ़ करने और अनुशासनात्मक व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में कई विद्यालयों ने अपनी शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहचान स्थापित की।
इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद जयंती के संदर्भ में भी उनके विचारों को याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज की शिक्षाओं को जीवंत रखने हेतु दयानंद एंग्लो-वैदिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई थी। “वेदों की ओर लौटें” के उनके संदेश ने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। आज डीएवी नेटवर्क आधुनिक शिक्षा के साथ वैदिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति का संगम प्रस्तुत कर देश के सबसे बड़े शैक्षिक समूहों में से एक बन चुका है। शोकसभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।





















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