अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर बच्चों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि समय रहते सजगता न दिखाई जाए, तो मासूम जिंदगियां बड़ी साजिशों का शिकार बन सकती हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों की सतर्कता से तीन नाबालिग बच्चों की जान बच सकी।
मामला रविवार रात का है, जब मुरलीगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या दो से 8, 13 और 16 वर्ष के तीन नाबालिग लड़कों को एक कथित तांत्रिक द्वारा बहला-फुसलाकर कुमारखंड थाना क्षेत्र स्थित चंडीस्थान मंदिर ले जाया गया। आरोप है कि मंदिर परिसर में रात के समय पूजा-पाठ के नाम पर बच्चों को बैठाया गया था और उनके साथ अनहोनी की आशंका जताई जा रही है। इसी दौरान एक बच्चे के परिजन किसी तरह मौके पर पहुंच गए। स्थिति को भांपते ही उन्होंने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कथित तांत्रिक को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।
पकड़े गए आरोपी की पहचान बिहार के बेगूसराय जिले के तेघरा थाना अंतर्गत पुरानी बाजार भागीरथी रोड, वार्ड संख्या तीन निवासी कन्हैया कुमार के रूप में की गई है। ग्रामीणों ने उसे मुरलीगंज थाना के हवाले कर दिया, जहां पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। तलाशी के दौरान आरोपी के थैले से एक धारदार चाकू भी बरामद किया गया है।
बच्चों के परिजनों का आरोप है कि आरोपी पिछले तीन दिनों से इलाके में घूम रहा था और बच्चों को चॉकलेट व अन्य चीजों का लालच देकर अपने साथ ले गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी बार-बार बयान बदल रहा है, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेला था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। यह घटना एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और झूठी आस्थाओं के नाम पर बच्चों को कैसे निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे मामलों में अभिभावकों की सतर्कता, सामाजिक जागरूकता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ही मासूमों की सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल बन सकती है।
मधेपुरा/मुरलीगंज।




















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