रांची। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत राज्य के लगभग 15 जिलों में कार्यरत लोकपालों को सेवा अवधि का विस्तार नहीं दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायत निवारण और निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका गहराने लगी है। लोकपालों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब संबंधित जिलों के उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) द्वारा उनसे कार्यालय, वाहन एवं अन्य सरकारी सुविधाएं वापस करने को कहा जा रहा है। इस क्रम में पलामू और रामगढ़ जिलों के डीडीसी ने लोकपालों को औपचारिक पत्र भी जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित लोकपालों का चार वर्षीय कार्यकाल 8 फरवरी को समाप्त हो चुका है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्रामीण विकास विभाग से सेवा विस्तार को लेकर पूर्व में मंतव्य मांगा गया था, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया। परिणामस्वरूप लोकपालों की सेवाएं स्वतः समाप्त मानी जा रही हैं।
लोकपालों को अवधि विस्तार नहीं मिलने से मनरेगा से जुड़ी अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, फर्जी जॉब कार्ड, मजदूरी भुगतान में देरी और कार्यस्थलों पर सुविधाओं की कमी जैसी शिकायतों की सुनवाई पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में लोकपाल के पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, लेकिन तब तक शिकायतों के निपटारे में विलंब तय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि मनरेगा लोकपाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लोकपाल को स्वतंत्र रूप से जांच करने, संबंधित पदाधिकारियों से जवाब तलब करने और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का अधिकार प्राप्त होता है। उनकी सिफारिशों के आधार पर दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मियों पर कार्रवाई भी की जाती है। जानकारों का मानना है कि लोकपालों की अनुपस्थिति में ग्रामीण मजदूरों की शिकायतें लंबित रह सकती हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। ऐसे में सरकार से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा की जा रही है, ताकि मनरेगा की निगरानी व्यवस्था कमजोर न पड़े।






















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