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सफलता की कहानी: एक पहल जिसने बदली ज़िंदगी, पॉक्सो पीड़िता अनाथ बच्ची को मिला नया जीवन, नीता पाठक की पहल बनी उम्मीद की रोशनी

On: February 9, 2026 12:29 AM
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कभी पहचान के बिना, सहारे के बिना और भविष्य के डर के साथ जी रही एक अनाथ पॉक्सो पीड़िता आज सम्मान, सुरक्षा और विश्वास के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर चुकी है। यह परिवर्तन संभव हो पाया सामाजिक कार्यकर्ता एवं पॉक्सो विक्टिम सपोर्ट पर्सन नीता पाठक की संवेदनशील, समयबद्ध और मानवीय पहल से—जो यह सिद्ध करता है कि सही समय पर मिला सहयोग किसी की पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल सकता है।

देवघर | समाज में जहां अक्सर पीड़िताएं न्याय और सहारे के लिए भटकती नजर आती हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने प्रयासों से टूटती ज़िंदगियों को नई दिशा देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक और संवेदनशील पहल सामने आई है, जहां सामाजिक कार्यकर्ता एवं पॉक्सो विक्टिम सपोर्ट पर्सन नीता पाठक ने एक अनाथ पॉक्सो पीड़िता बच्ची को न केवल न्याय की राह दिखाई, बल्कि उसे सम्मानजनक नया जीवन भी दिलाया।

जानकारी के अनुसार, 5 दिसंबर 2025 को नीता पाठक के प्रयास से एक अनाथ बच्ची का विधिवत कोर्ट मैरिज संपन्न कराया गया। यह बच्ची अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद पूरी तरह बेसहारा हो गई थी। स्थिति को गंभीरता से देखते हुए सीडब्ल्यूसी देवघर एवं DCPO देवघर के निर्देश पर बच्ची को रेस्क्यू किया गया और करीब तीन वर्षों तक देवघर जिला बालिका संप्रेषण गृह में सुरक्षित आश्रय दिया गया।

यह मामला केवल अनाथ होने तक सीमित नहीं था। पीड़िता एक पॉक्सो विक्टिम भी थी और उसका एक तीन वर्ष का बेटा है। दूर-दूर तक कोई रिश्तेदार नहीं होने के कारण बच्ची और उसके बच्चे के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी। नवंबर 2022 में न्यायालय द्वारा नीता पाठक को इस केस में सपोर्ट पर्सन नियुक्त किया गया। कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान बच्ची ने अपने बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विवाह करने की इच्छा जाहिर की। पीड़िता की सहमति, सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए न्यायालय की प्रक्रिया पूरी की गई और कोर्ट मैरिज के बाद सम्मानपूर्वक उसकी विदाई कराई गई।

यह पहल केवल एक शादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पॉक्सो पीड़िताओं के पुनर्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है। नीता पाठक की यह भूमिका बताती है कि अगर सिस्टम के भीतर संवेदनशीलता और समाज की भागीदारी हो, तो सबसे कठिन हालात में भी पीड़ितों को नया जीवन मिल सकता है। इस घटना ने समाज के सामने यह सवाल भी रखा है कि क्या हम पीड़िताओं को केवल सहानुभूति तक सीमित रखेंगे, या उनके भविष्य के लिए ठोस कदम भी उठाएंगे? नीता पाठक की यह पहल निश्चित रूप से अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, संस्थाओं और प्रशासन के लिए प्रेरणा बनेगी।

✍️ आलेख : डी.एन. तिवारी
समाचार संपादक | News Scale Live

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