प्रतापपुर (चतरा)। भारतीय संस्कृति, जो सदियों से अनुशासन और पारिवारिक सम्मान की पहचान रही है, आज मोबाइल की रील संस्कृति की चकाचौंध में तेजी से क्षीण होती जा रही है। कुछ पैसों और लाइक्स की लालसा में युवा ही नहीं, बल्कि बुज़ुर्ग भी अश्लील गानों पर वीडियो बनाकर समय और संस्कार दोनों को बर्बाद कर रहे हैं। कभी दादा-पोती और पिता-पुत्र जैसे पवित्र रिश्ते सम्मान के आधार थे। लेकिन अब वही लोग प्रेम प्रसंग वाले गानों पर युगल जोड़ियाँ बनकर नाचते दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति समाज की नैतिकता और आने वाली पीढ़ी पर गहरा असर डाल रही है। सोशल मीडिया पर उपयोगी जानकारी भी मिलती है, परंतु अधिकांश रीलें अश्लील गानों और बेहूदे भाव-भंगिमाओं पर आधारित हैं। चिंताजनक बात यह है कि कई अभिभावक अपने बच्चों के अशोभनीय वीडियो पर गर्व करते नज़र आते हैं। समाजशास्त्रियों के अनुसार यह डिजिटल लोकप्रियता बच्चों को वर्तमान, भविष्य और चरित्रकृतीनों से भटका रही है। कई युवा केवल त्वरित कमाई के लिए ऐसे कंटेंट बना रहे हैं। सवाल यह है कि क्या अश्लीलता और मर्यादा तोड़कर कमाया गया पैसा उचित है? विशेषज्ञों का मानना है कि गलत स्रोत से हुई कमाई अंततः पछतावे का कारण बनती है। कई ऐप्स युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहे हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि युवा पीढ़ी लाइक्स, फॉलोअर्स और त्वरित कमाई के लालच से बचकर भारतीय संस्कृति, मर्यादा और पारिवारिक सम्मान की रक्षा करे।
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