समिति का निबंधन पूरा, प्रदीप साहू बने सचिव; राष्ट्र की एकता, शिक्षा, जल संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता पर रहेगा जोर
लोहरदगा : जिले में लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय जय श्री राम समिति अब ट्रस्ट के रूप में स्थापित हो गई है। ट्रस्ट का निबंधन पूरा हो चुका है, जिसका निबंधन संख्या 2026/LOH/1877/BH4/26 है। इसकी जानकारी समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार अग्रवाल ने दी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के रूप में स्थापित होने के बाद सामाजिक, धार्मिक और जनहित से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए सुनील कुमार अग्रवाल को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, रमेश कुमार राय, विक्रम कुमार और विनोद कुमार उरांव उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। प्रदीप साहू को सचिव नियुक्त किया गया है। जीवन महतो और सत्यकेतु प्रसाद सहसचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। कपिल देव मिश्रा को कोषाध्यक्ष तथा विनोद प्रसाद और अनिल रविदास को सहकोषाध्यक्ष बनाया गया है।

राष्ट्र की एकता और सामाजिक सेवा पर रहेगा जोर
ट्रस्ट का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इन मूल्यों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करना है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
ट्रस्ट समाज के लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक सहयोग भी प्रदान करेगा। जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से सामाजिक वानिकी और पौधरोपण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

शिक्षा और कृषि को बढ़ावा देना भी ट्रस्ट के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इसके माध्यम से लोगों में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, जनहित से जुड़े मुद्दों पर पहल करने और समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
समिति के नाम के दुरुपयोग पर होगी कानूनी कार्रवाई
सुनील कुमार अग्रवाल ने कहा कि जय श्री राम समिति के नाम का इस्तेमाल अब ट्रस्ट के नाम और उसकी आधिकारिक पहचान के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन समिति के नाम का अनधिकृत उपयोग करता है, तो ट्रस्ट उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।

ट्रस्ट के गठन को समिति की गतिविधियों को संगठित और व्यवस्थित रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से सामाजिक सेवा, धार्मिक गतिविधियों और जनकल्याण के कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है।

















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