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आरटीआई कानून के 21 वर्ष पूरे, झारखंड के 20 जिलों के 150 लोगों ने सीखी आवेदन और अपील की प्रक्रिया

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हमर अधिकार मंच और रांची सिटीजन फोरम की निःशुल्क कार्यशाला में सूचना आयोग की निष्क्रियता पर जताई चिंता, सुनवाई शुरू कराने के लिए राष्ट्रपति और न्यायपालिका से गुहार लगाने का निर्णय

रांची। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के 21 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हमर अधिकार मंच और रांची सिटीजन फोरम की ओर से सोमवार को कोकर, रांची में निःशुल्क आरटीआई कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें झारखंड के 20 जिलों से आए 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में आरटीआई आवेदन तैयार करने, निर्धारित समय पर सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपील करने और इसके बाद द्वितीय अपील की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यशाला की अध्यक्षता हमर अधिकार मंच के अध्यक्ष एवं सर्टिफाइड आरटीआई रिसोर्स पर्सन दीपेश निराला ने की। उन्होंने प्रतिभागियों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 और इसके तहत बनाए गए नियमों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित विभाग के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की जा सकती है। इसके बाद भी निर्धारित अवधि में सूचना नहीं मिलने पर नियमानुसार राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की जा सकती है।

सूचना आयोग में सुनवाई शुरू नहीं होने पर जताई चिंता

कार्यशाला में झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से लंबित द्वितीय अपीलों और शिकायतों की सुनवाई शुरू नहीं होने पर प्रतिभागियों ने चिंता जताई। मंच की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 8 मई 2020 से आयोग में सुनवाई बाधित है। प्रतिभागियों ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सूचना आयोग का सक्रिय रहना जरूरी है।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 10 जून 2026 को चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हुई थी और उन्हें 1 जुलाई 2026 को शपथ दिलाई गई थी। इसके बावजूद आयोग में लंबित हजारों द्वितीय अपीलों और शिकायतों पर सुनवाई शुरू नहीं होने को लेकर कार्यशाला में उपस्थित लोगों ने नाराजगी जताई।

मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति या कार्यवाहक व्यवस्था की मांग

कार्यशाला में निर्णय लिया गया कि झारखंड राज्य सूचना आयोग को सक्रिय करने और लंबित मामलों की सुनवाई शुरू कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय एवं झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों और भारत की राष्ट्रपति को लिखित आग्रह भेजा जाएगा।

प्रतिभागियों ने मांग की कि राज्य में तत्काल मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जाए। वैकल्पिक रूप से, पूर्व में नियुक्त चार सूचना आयुक्तों में से किसी एक को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी देकर आयोग में सुनवाई शुरू कराई जाए। उनका कहना था कि आयोग के सक्रिय होने से सूचना के अधिकार के तहत न्याय पाने की प्रतीक्षा कर रहे आवेदकों को राहत मिल सकती है।

कई पदाधिकारी और प्रतिभागी रहे मौजूद

कार्यशाला में संस्था की उपाध्यक्ष रेणुका तिवारी, प्रिय ब्रत प्रसाद, नवल किशोर लाल, मीना कुमारी, महासचिव उमाशंकर सिंह, कोषाध्यक्ष विनोद जैन बेगवानी, सचिव चंद्रदेव कुमार बरनवाल ‘चंदू’, अनूप श्रीवास्तव, ओम प्रकाश उपाध्याय, आशीष जायसवाल, दीनबंधु कुमार, जूही कुमारी चौधरी, सुजीत कुमार पांडेय, कुमार अभिषेक दुबे और अखिल कुमार सहित विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रेणुका तिवारी और मीना कुमारी ने किया।

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