भाषा विवाद को लेकर जताई नाराजगी, झारखंड में रोजगार देने की मांग; मांग पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
मुंबई। भाषा विवाद को लेकर मुंबई में रह रहे झारखंड के ड्राइवरों ने सोमवार को आक्रोश प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड सरकार से राज्य में ही पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले झारखंड के लोगों को कई बार भाषा और क्षेत्रवाद से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ठोस पहल करे, अन्यथा झारखंड में इससे भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन का संचालन ब्रह्मदेव प्रजापति, विशाल साव, ईश्वर साव, प्रीत साव, सुरेंद्र रजक, उपेंद्र साव, उमेश साव और बसंत साव समेत अन्य लोगों ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि झारखंड के हजारों लोग रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत देश के विभिन्न महानगरों में काम कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग ड्राइविंग, निर्माण, होटल, परिवहन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इन महानगरों की अर्थव्यवस्था में झारखंड समेत उत्तर प्रदेश और बिहार से जाकर काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद आरोप है कि मुंबई जैसे शहरों में दूसरे राज्यों से आए लोगों को स्थानीय भाषा बोलने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि स्थानीय भाषा नहीं बोल पाने वाले लोगों के साथ कई बार अभद्र व्यवहार और मारपीट की घटनाएं भी सामने आती हैं।
झारखंडी ड्राइवरों ने केंद्र एवं झारखंड सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने और रोजगार करने का अधिकार मिलना चाहिए। सरकार झारखंड में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए, ताकि लोगों को मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़े।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया गया तो झारखंड में व्यापक स्तर पर आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा।





















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