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बारिश में तंबू, आंसू गैस के बीच आंदोलन की कमान!

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जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रविंद्र पासवान बने छात्रों की आवाज

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में रांची के छात्र नेता रविंद्र पासवान सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। आंदोलन के दौरान वे छात्रों के बीच रहकर रणनीति तैयार करने, अगले कार्यक्रम की जानकारी देने और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील करते रहे हैं।

आंदोलन से जुड़े छात्रों के अनुसार, रविंद्र पासवान सुबह से ही प्रदर्शन स्थल पर सक्रिय रहते हैं और परीक्षा संबंधी विवादों, कथित पेपर लीक तथा अन्य आरोपों को लेकर छात्रों के बीच अपनी बात रखते हैं। बारिश के बीच भी उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के साथ रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति और पुलिस कार्रवाई के बीच भी उन्होंने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उनका कहना है कि आंदोलन को किसी भी असामाजिक तत्व के प्रभाव में नहीं आने दिया जाना चाहिए और छात्रों की मांगों को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाया जाना चाहिए।

आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक की सीबीआई जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने तथा दोषी अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शामिल है। छात्रों की ओर से सरकार को चेतावनी भी दी गई है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव सहित बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

आंदोलन के दौरान रविंद्र पासवान का एक बयान भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने भगत सिंह के संघर्ष का संदर्भ देते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। हालांकि, ऐसे बयानों को उनके आंदोलन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।

रविंद्र पासवान की सक्रियता का एक पहलू यह भी है कि वे किसी बड़े मंच या चर्चित सोशल मीडिया चेहरे के रूप में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर छात्रों के बीच रहकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले युवा नेता के रूप में सामने आए हैं।

छात्र आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर समर्थक उन्हें संघर्षशील और अनुशासित नेतृत्व का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं, पूरे मामले में सरकार और संबंधित परीक्षा संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष तथा जांच के निष्कर्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल छात्रों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं और आंदोलन के आगे की रणनीति को लेकर रांची में राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज है।

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