Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

सिविल कोर्ट में मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला आयोजित, पॉक्सो और जेजे एक्ट पर हुई विस्तृत चर्चा

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

​लोहरदगा: सिविल कोर्ट में मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला आयोजित, पॉक्सो और जेजे एक्ट पर हुई विस्तृत चर्चा

​संवाददाता, लोहरदगा

​18 जुलाई, 2026: झालसा (रांची) के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (PDJ) सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA), लोहरदगा श्री राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर स्थित सभागार में एक दिवसीय ‘मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मुख्य रूप से पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, जूविनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, बाल कल्याण समिति (CWC) के कार्यों एवं इससे जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

​दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ

​कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ पीडीजे सह अध्यक्ष डालसा श्री राजकमल मिश्रा, प्रधान न्यायधीश कुटुंब न्यायालय श्रीमती प्रेमलता त्रिपाठी, डीजे द्वितीय श्रीमती नीरजा आसरी, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री हेमंत कुमार सिन्हा और विभिन्न थानों से पहुंचे अनुसंधान अधिकारियों (IO) ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डालसा सचिव श्री मनोरंजन कुमार ने किया, जिन्होंने पॉक्सो से संबंधित धाराओं और आवश्यक कानूनी कार्रवाइयों की विस्तृत जानकारी दी।

​अनुसंधान में संवेदनशीलता बेहद ज़रूरी: पीडीजे

​कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजकमल मिश्रा ने कहा कि वर्ष में दो बार पॉक्सो एक्ट से संबंधित विषयों पर बेहतर अनुसंधान (Investigation) और विचारण (Trial) के लिए इस तरह की कार्यशाला आयोजित की जाती है।

​उन्होंने जांच अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “केस के अनुसंधान में आपका योगदान सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए बेहद संवेदनशील होकर जांच करें।”

​पीडीजे ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो एक्ट में पीड़िता की उम्र एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु है।

​उन्होंने जोर देकर कहा कि चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करने के बाद भी जांच अधिकारियों का दायित्व कम नहीं होता। पीड़ित को न्याय तभी मिल पाएगा जब समय पर गवाहों के बयान होंगे। गवाहों और आवश्यक दस्तावेजों को समय पर अदालत में प्रस्तुत करना आईओ की मुख्य जिम्मेदारी है।

​निर्दोष को सजा न मिले और पीड़ित को मिले न्याय: अधिवक्ता संघ

​जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा कि अनुसंधान एक कला है और इसे पूरी संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। मानवता के आधार पर मामले की सावधानीपूर्वक जांच करें ताकि किसी निर्दोष को सजा न मिले। वहीं, संघ के सचिव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से समाज अव्यवस्थित होता है। पॉक्सो का मामला आते ही तुरंत एफआईआर दर्ज कर सही दिशा में जांच शुरू करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सके।

​एफआईआर दर्ज न करने पर सजा का प्रावधान: डीसीपीओ

​जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPO) बीरेन्द्र ने कहा कि पॉक्सो एक बेहद संवेदनशील मामला है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक गंभीर है। इसमें एक छोटी सी भूल भी किसी पीड़ित को न्याय से वंचित कर सकती है या किसी निर्दोष को कटघरे में खड़ा कर सकती है। उन्होंने सचेत किया कि पॉक्सो का मामला सामने आने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर कानून में सजा का प्रावधान है। उन्होंने बाल कल्याण समिति के कार्यों और पीड़ितों के अधिकारों पर भी प्रकाश डाला।

​चिकित्सीय जांच और कानूनी बारीकियों पर मंथन

​कार्यशाला में सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अक्षय सक्सेना ने पीड़ितों की चिकित्सीय जांच (Medical Examination) से जुड़े तकनीकी व महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी दी। इसके अलावा, कार्यशाला के अंतिम चरण में एक प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित अनुसंधानकर्ताओं और हितधारकों के सवालों व शंकाओं का विशेषज्ञों द्वारा निवारण किया गया।

​ये रहे उपस्थित

​इस मौके पर मुख्य रूप से एपीपी सुमन कुमार, एलएडीसीएस (LADCS) चीफ श्री नसीम अंसारी, एलएडीसीएस के अधिवक्तागण, विभिन्न थानों के अनुसंधानकर्ता (IO), बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष व सदस्य, पैनल अधिवक्ता, पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) समेत न्यायालय के कई अन्य कर्मी और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment