कोयला वाहनों से बढ़ती मौतों और प्रदूषण पर झामुमो नेता मनोज चंद्रा का प्रशासन व कोल कंपनियों को अल्टीमेटम
सिमरिया (चतरा)। एनटीपीसी और सीसीएल द्वारा संचालित कोयला वाहनों से लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं, बढ़ते वायु प्रदूषण और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ अब स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। शनिवार को सिमरिया अनुमंडल मुख्यालय स्थित किसान भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में झामुमो नेता मनोज कुमार चंद्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 9 अगस्त तक प्रशासन और कोल कंपनियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो जिले में व्यापक स्तर पर “हाइवा चतरा छोड़ो आंदोलन” शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चट्टी बरियातू (हजारीबाग) से कोयला पहुंचाने के लिए करीब 25 किलोमीटर का सीधा मार्ग उपलब्ध है, लेकिन ट्रांसपोर्टर अधिक मुनाफे के लिए 105 किलोमीटर लंबे मार्ग चट्टी बरियातू-हजारीबाग-सुल्ताना-बिरहु-सिमरिया-धनगड़ा-मिश्रोल-सेरनदाग-टंडवा का उपयोग कर रहे हैं। इससे चतरा जिले की सड़कों पर लगातार हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है।
मनोज चंद्रा ने कहा कि 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने “भारत छोड़ो आंदोलन” का आह्वान किया था। उसी तर्ज पर 9 अगस्त 2026 से हजारीबाग से चतरा होकर पुनः हजारीबाग जाने वाले सभी भारी हाइवा वाहनों का परिचालन रोकने के लिए “हाइवा चतरा छोड़ो अभियान” चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब कोयला वाहनों से होने वाली किसी भी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
उन्होंने मांग की कि सिमरिया की तर्ज पर गिद्धौर में भी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक भारी एवं कोयला वाहनों के परिचालन पर सख्ती से नो-एंट्री लागू की जाए। साथ ही एनटीपीसी टंडवा और केटीपीसी बांझेडीह से निकलने वाली कोयले की छाई (फ्लाई ऐश) की कथित अवैध ढुलाई को नियमानुसार संचालित किया जाए या उस पर रोक लगाई जाए।
प्रेस वार्ता में यह भी मांग उठाई गई कि छाई ढुलाई में लगे टिप ट्रेलरों की जगह स्थानीय वाहनों को प्राथमिकता देकर क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में कोल कंपनियां और ट्रांसपोर्टर सीएसआर के तहत सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
बैठक में उपस्थित लोगों ने कई सुझाव भी दिए। इनमें आम्रपाली कोल परियोजना से संचालित कोयला परिवहन के लिए सुरक्षित और व्यावहारिक नियम लागू करने, कल्याणपुर से सिमरिया तक सड़क सुरक्षा के लिए स्थानीय युवाओं की तैनाती, नियमित सड़क सफाई और पानी का छिड़काव कर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं।





















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