अंतिम छोर पर बसे चोरदाहा में विकास की राह अधूरी: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही जनता; जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से फूटा आक्रोश
न्यूज स्केल लाइव,आशीष पांडेय
हजारीबाग (चौपारण)। ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित झारखंड’ के बड़े-बड़े प्रशासनिक दावों के बीच राज्य के अंतिम छोर पर बसे ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत आज भी बेहद डरावनी और चिंताजनक है. हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के सुदूरवर्ती सीमांत क्षेत्र में स्थित चोरदाहा पंचायत आजादी के अमृत काल में भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटकर रह गई है.
पंचायत के गड़ मोरवा सहित कई आश्रित गांवों के ग्रामीणों का दैनिक जीवन आज भी नियमित बिजली, शुद्ध पेयजल और आंगनबाड़ी जैसी अत्यंत अनिवार्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय बना हुआ है. ‘न्यूज स्केल लाइव’ की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि इस सुदूरवर्ती इलाके में सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों तक ही सीमित हैं, जिससे स्थानीय जनता में व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है.
पानी के लिए मीलों का सफर, ढिबरी युग में जीने को विवश हैं नौनिहाल
चोरदाहा पंचायत के गड़ मोरवा गांव में पहुंचे हमारे संवाददाता आशीष पांडेय को ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि गांव में आज तक शुद्ध पेयजल की कोई सुदृढ़ विधिक व्यवस्था नहीं की गई है. कई पीड़ित परिवार आज भी अपनी प्यास बुझाने के लिए भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में मीलों दूर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों या चुआं-दारी से पानी ढोने को मजबूर हैं.
यही हाल बिजली व्यवस्था का भी है; बिजली की नियमित और समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी लालटेन और ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. बिजली संकट के कारण स्कूली बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह चौपट हो रही है, जबकि लोगों का सामान्य घरेलू कामकाज और आजीविका से जुड़े काम पूरी तरह ठप पड़े हैं.
आंगनबाड़ी केंद्र गायब, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नहीं मिल रहा सरकारी लाभ
ग्रामीणों ने प्रशासनिक उपेक्षा का एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके कारण गांव के छोटे नौनिहाल बच्चों, धात्री माताओं और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने वाली अति-महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य व पोषाहार योजनाओं का कोई लाभ धरातल पर नहीं मिल पा रहा है.
ग्रामीणों ने दुख जताते हुए कहा कि: “हमने कई बार अपनी इन ज्वलंत समस्याओं की ओर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया है. लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही मिले, जमीनी स्तर पर कोई स्थायी विधिक समाधान नहीं निकाला जा सका. आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी हकों के लिए तरसना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान है.”
चोरदाहा पंचायत ग्राउंड रिपोर्ट: एक नजर में
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│ मुख्य प्रभावित क्षेत्र │ गड़ मोरवा गांव, चोरदाहा पंचायत, चौपारण प्रखंड │
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│ मुख्य प्रशासनिक जिला │ हजारीबाग (झारखंड) │
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│ बुनियादी संकट के मुख्य बिंदु │ 1. नियमित बिजली 2. शुद्ध पेयजल 3. आंगनबाड़ी │
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│ प्रभावित वर्ग │ स्कूली बच्चे, गर्भवती महिलाएं, आम ग्रामीण जनता │
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│ स्थानीय जनता की मुख्य मांग │ जिला प्रशासन व उपायुक्त द्वारा त्वरित विधिक जांच│
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│ ग्राउंड जीरो रिपोर्टर │ आशीष पांडेय (संवाददाता, न्यूज स्केल लाइव) │
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जिला प्रशासन और उपायुक्त से त्वरित विधिक हस्तक्षेप की मांग
भौगोलिक रूप से अंतिम छोर पर होने के कारण चोरदाहा पंचायत हमेशा से प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेलती आ रही है. गड़ मोरवा के प्रबुद्ध ग्रामीणों और युवाओं ने सामूहिक रूप से हजारीबाग जिला प्रशासन, उपायुक्त और स्थानीय कद्दावर जनप्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की है कि इस सीमांत पंचायत की बदहाली का संज्ञान लेते हुए युद्धस्तर पर विकास कार्य शुरू कराए जाएं.
ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांव में बिजली के नए ट्रांसफार्मर, पेयजल के लिए चापाकल/जल मीनार और आंगनबाड़ी केंद्र की विधिक स्थापना नहीं की गई, तो सुदूरवर्ती क्षेत्र की जनता एकजुट होकर कड़ा रुख अख्तियार करेगी और आगामी चुनावों में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएगी.
























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